Tulsi Mein Kalawa Bandhna: सनातन धर्म में तुलसी के पौधे को बेहद पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,तुलसी के पौधे में मां लक्ष्मी का वास होता है। पद्म पुराण में भी तुलसी की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है और इसे भगवान विष्णु को प्रिय बताया गया है। इसलिए विष्णु जी की हर पूजा में तुलसी को जरूर शामिल किया जाता है वरना उनकी पूजा अधूरी मानी जाती है।
इसी वजह से तुलसी की पूजा से जुड़ी कई परंपराएं आज भी घरों में निभाई जाती हैं। कुछ लोग तुलसी के तने पर लाल धागा या कलावा बांधते हैं। इसे मुख्य रूप से धार्मिक लोक-परंपरा और मान्यता के तौर पर देखा जाता है।
धार्मिक मान्यता में लाल रंग को शुभता, शक्ति और मंगल का प्रतीक माना जाता है। तुलसी को भगवान विष्णु से जुड़ा पौधा माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा के दौरान कलावा अर्पित करने को भी शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि तुलसी में कलावा बांधने से घर के क्लेश मिटते हैं और शांति बनी रहती है।
विशेषकर गुरुवार को तीन गांठों वाला धागा बांधकर मन की इच्छा मांगने से कार्य पूर्ण होते हैं।
इससे मां लक्ष्मी आकर्षित होती हैं और धन-धान्य का लाभ मिलता है।
गुरुवार और शुक्रवार को तुलसी में कलावा बांधने के लिए शुभ बताया जाता है। गुरुवार भगवान विष्णु से जुड़ा दिन माना जाता है, जबकि शुक्रवार को मां लक्ष्मी की पूजा से जोड़ा जाता है। इसके अलावा, कुछ परंपराओं में विशेष तिथियों पर भी तुलसी को कलावा अर्पित करने का उल्लेख मिलता है। इसलिए अगर आप यह परंपरा निभाना चाहते हैं तो इन दो दिनों पर सुबह स्नान के बाद तुलसी की पूजा करके कलावा अर्पित कर सकते हैं।
सबसे पहले तुलसी के आस-पास की जगह को साफ करें।
स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और तुलसी के सामने दीपक जलाएं।
पौधे पर थोड़ा जल अर्पित करने के बाद लाल कलावे को तने पर बहुत हल्के हाथ से बांधें।
धागा इतना कसकर न बांधें कि तने पर दबाव पड़े।
पौधा जीवित है, इसलिए धार्मिक परंपरा निभाते समय उसकी देखभाल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
धागा बांधते समय भगवान विष्णु या तुलसी माता का स्मरण कर सकते हैं।
अपनी श्रद्धा के अनुसार 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करना भी शुभ है।