कब मनाया जाता है ज्येष्ठ गौरी आवाहन (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

तीन दिनों की 'ज्येष्ठ गौरी आवाहन' पूजा रविवार से, जानिए माता महालक्ष्मी पूजा से जुड़ी सारी मान्यताएं

Mahalaxmi Vrat: हिन्दू धर्म में गौरी आवाहन का बड़ा महत्व हैं। गौरी माता को शक्ति, सौंदर्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। मान्यता है कि गौरी पूजन से अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख की प्राप्ति होती है।

सीमा कुमारी

Gauri Pujan Kab Hai 2025: 31 अगस्त 2025 रविवार से 3 दिवसीय महालक्ष्मी का व्रत शुरू हो रही है जो 2 सितंबर 2025 मंगलवार को समाप्त होगी। यह त्योहार महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में बड़े ही धूमधाम एवं उत्साह से मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से गणेशोत्सव के दौरान मनाया जाता है और तीन दिनों तक विशेष रूप से मनाया जाता है गौरी आवाहन, गौरी पूजन और गौरी विसर्जन।

यह पर्व महिलाओं के लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि इसे सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। ज्येष्ठ गौरी व्रत के दिन महिलाएं माता पार्वती की पूजा अर्चना करती है। माता पार्वती का स्वरूप है देवी गौरी है।

मान्यता है कि देवी गौरी की पूजा-अर्चना करने से सुख, समृद्धि, और सौभाग्य की प्राप्ति होती है, वैवाहिक जीवन में शांति आती है, और पति की लंबी आयु की कामना पूरी होती है।

अविवाहित कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है, और मांगलिक दोष से पीड़ित व्यक्तियों को संतान सुख प्राप्त हो सकता है। इसके अतिरिक्त, यह पारिवारिक एकता को बढ़ावा देता है और भगवान शिव का आशीर्वाद दिलाता है। आइए जानिए गौरी पूजन का महत्व, पूजा विधि और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण बातें-

कब मनाया जाता है ज्येष्ठ गौरी आवाहन

आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गौरी आवाहन किया जाता है। इस वर्ष 2025 में गौरी आवाहन 31 अगस्त, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं देवी गौरी की मूर्ति घर लाकर उनका भव्य स्वागत करती हैं।

कैसे करें गौरी आवाहन विधि

  • सबसे पहले घर की साफ-सफाई कर पूजा स्थान को सजाएं।
  • घर के दरवाजे पर तोरण, हल्दी-कुमकुम और दीपक से स्वागत करें।
  • देवी गौरी की दो मूर्तियाँ (माँ पार्वती और अशोकसुंदरी) स्थापित करें।
  • उन्हें स्नान कराकर लाल या गुलाबी वस्त्र पहनाएं।
  • देवी का सोलह श्रृंगार कर उन्हें गहनों और फूलों से सजाएं।
  • कलश स्थापना कर उस पर नारियल और आम के पत्ते रखें।
  • देवी को फल, मेवा, मिठाई और पंचामृत अर्पित करें।
  • कपूर की आरती कर “ॐ पार्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करें।
  • दिनभर महिलाएं गीत-संगीत और मंगल गीतों से माता का गुणगान करती हैं।

जानिए क्या है गौरी आवाहन का धार्मिक महत्व

हिन्दू धर्म में गौरी आवाहन का बड़ा महत्व हैं। यह पावन पर्व गौरी माता को शक्ति, सौंदर्य और समृद्धि की देवी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि गौरी पूजन से अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख, धन-धान्य और परिवार की उन्नति होती है।

पौराणिक कथा के अनुसार, जब असुरों के अत्याचार से महिलाएं परेशान थीं, तब उन्होंने माता गौरी की शरण ली। देवी ने उन्हें सुरक्षित किया और दुष्ट शक्तियों का नाश किया। तभी से यह पर्व सुरक्षा, सुख और वैवाहिक सौख्य के लिए विशेष रूप से मनाया जाने लगा।

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