शनि देव (सौ .Gemini)  
धर्म

Shani Vakra Drishti: शनि की वक्र दृष्टि से कैसे बचें? यहां जानिए सबसे सटीक उपाय!

Shani Vakra Drishti Kya Hai: शनि की वक्र दृष्टि से बचने के लिए शनि देव की पूजा, शनि मंत्रों का जाप और कुछ उपाय शनि के नकारात्मक प्रभाव को कम कर व्यक्ति के जीवन में शांति और स्थिरता ला सकते है।

सीमा कुमारी

Shani Vakra Drishti Se Bachne Ke Upay: सनातन हिन्दू परंपरा में शनिदेव को मनाने के लिए शनिवार और शनि जयंती का दिन अत्यंत ही शुभ माना गया है। 16 मई को शनिदेव का जन्मोत्सव मनाया जा रहा है। यह दिन शानि भक्तों के लिए बड़ा महत्व रखता है।

धर्म शास्त्रों में शनिदेव की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है। यदि शनिदेव किसी पर प्रसन्न हो जाएं तो उसकी झोली खुशियों से भर देते हैं, लेकिन यदि नाराज हो जाएं तो राजा को भी रंक बनने में देर नहीं लगती है।

शनि पूजा से जुड़े क्या है नियम ?

ज्योतिष बताते है कि,शनि पूजा के भी अपने कुछेक नियम होते हैं, जिनका पालन करना बहुत जरूरी होता है।

  • तन और मन दोनों की शुद्धता

हिन्दू लोक मान्यता के अनुसार, शनि पूजा के लिए तन और मन दोनों की शुद्धता बेहद जरूरी मानी गयी है। शनि पूजा से पहले साधक को स्नान-ध्यान करने के बाद नीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।

  • पश्चिम दिशा में करें पूजा

शास्त्रों के अनुसार, शनि की पूजा भी सही दिशा की ओर मुंह करके करनी चाहिए। वास्तु के अनुसार, शनि पश्चिम दिशा का स्वामी है, इसलिए साधक को हमेशा पश्चिम की तरफ मुंह करके शनि की पूजा और उनके मंत्र आदि का जप करना चाहिए।

  • सूर्य उदय से पहले या शाम को सूर्यास्त के बाद

हिंदू लोक मान्यता के अनुसार, शनिदेव की पूजा हमेशा सूर्य देवता के उदय होने से पहले या फिर सूर्य देवता के अस्त होने के बाद करनी चाहिए।

  • खड़े होने की दिशा

हिंदू परंपरा में शनिदेव की पूजा करते समय कुछ स्थानों और दिशाओं का विशेष ध्यान रखने की लोक-मान्यता है। कहा जाता है कि भक्त को सीधे उनके सामने खड़े होने के बजाय मूर्ति या चित्र के दाईं या बाईं ओर खड़े होकर पूजा करनी चाहिए। यह भावना श्रद्धा और विनम्रता को दर्शाने के रूप में समझी जाती है, ताकि पूजा में अहंकार नहीं बल्कि समर्पण बना रहे।

  • लोहे के बर्तन का प्रयोग

ज्योतिष के अनुसार शनि की पूजा में हमेशा लोहे के बर्तन का प्रयोग करना चाहिए। भूलकर भी शनिदेव की पूजा में तांबे के बर्तन का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि शनिदेव की अपने पिता के साथ नहीं बनती है।

  • दान -पुण्य करें

शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनि जयंती पर दान करने की परंपरा है। इस दिन लोग अपनी क्षमता अनुसार काला तिल, काला कंबल, लोहे का सामान आदि जरूरतमंदों को दान करते हैं। यह मान्यता सेवा और दया की भावना को बढ़ाने पर आधारित है और इसे शनि कृपा से जोड़कर देखा जाता है।

  • झूठ न बोले

बताया जाता है कि, शनिदेव की साधना करने वाले साधक को भूलकर भी झूठ नहीं बोलना चाहिए और न ही किसी गलत कार्य को करना चाहिए क्योंकि शनिदेव न्यायधीश हैं और वह व्यक्ति को उसके कर्म का फल जरूर देते है।

  • सरसों के तेल का चौमुखा दीया

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए साधक को शाम के समय शनि देवता की मूर्ति और पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का चौमुखा दीया जरूर जलाना चाहिए।

  • नीले रंग का करें इस्तेमाल

शनि पूजा में नीले रंग का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है।ऐसे में यदि संभव हो तो शनि की पूजा में नीले रंग के पुष्प जरूर अर्पित करें।

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