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Shani Jayanti: शनि जयंती से पहले जान लें ये जरूरी नियम, घर में शनि पूजा क्यों मानी जाती है वर्जित?

Shani Jayanti Rules: शनि जयंती से पहले शनिदेव की पूजा से जुड़े जरूरी नियमों को जान लेना बेहद जरूरी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, घर में शनि पूजा को लेकर कई विशेष सावधानियां और नियम बताए गए है।

सीमा कुमारी

Shani Jayanti Astrology Tip: सनातन धर्म में देवी-देवताओं की पूजा केवल श्रद्धा और भक्ति से ही नहीं, बल्कि नियमों और परंपराओं के अनुसार करने का विशेष महत्व बताया गया है। धर्म ग्रथों में बताया गया है कि विधि- पूर्वक पूजा करने से व्यक्ति को शुभ फल, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति मिलतीं है।

घर में शनिदेव की पूजा वर्जित क्यों मानी जाती है?

अगर बात शनिदेव की पूजा की करें तो, शनिदेव की पूजा को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। शनि देव को न्याय और कर्मफल का देवता माना जाता है, इसलिए उनकी पूजा में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

इन्हीं मान्यताओं में एक प्रमुख नियम यह भी है कि शनिदेव की पूजा घर के अंदर करने से बचना चाहिए। इसके पीछे पौराणिक कारण और धार्मिक विश्वास जुड़े हुए हैं।

शनि जयंती के पावन अवसर पर यदि आप भी शनिदेव की आराधना करने की सोच रहे हैं, तो पहले यह जान लेना जरूरी है कि आखिर घर में उनकी पूजा क्यों वर्जित मानी जाती है।

शनि पूजा के क्या है नियम?

पौराणिक मान्यता व कथा के अनुसार, सूर्यापुत्र शनिदेव को उनकी पत्नी ने यह श्राप दिया था कि जिस पर भी उनकी दृष्टि पड़ेगी, उसका प्रभाव कठिन हो सकता है।

  • शनिदेव को न्याय और कर्मफल का देवता भी माना गया है, जिनकी दृष्टि को अत्यंत प्रभावशाली बताया गया है।
  • पूजा के समय भक्त देवताओं की प्रतिमा को देखकर आराधना करते हैं, जिससे शनिदेव की “वक्र दृष्टि” के संपर्क में आने का भाव माना जाता है।
  • ऐसी मान्यता है कि घर में उनकी मूर्ति रखने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है।
  • इससे घर में सुख-शांति और सकारात्मकता पर असर पड़ने की आशंका बताई जाती है।
  • परिवार के सदस्यों के जीवन में बाधाएं या रुकावटें आने की मान्यता भी जुड़ी हुई है।
  • इसी कारण शनिदेव की पूजा घर के बजाय शनि मंदिर में करना अधिक शुभ माना जाता है।
  • शनिवार या शनि जयंती के दिन भक्त विशेष रूप से मंदिर जाकर पूजा और उपाय करते हैं।

कैसे करें शनि जयंती पर शनिदेव की पूजा

  • शनि जयंती के दिन सुबह उठें और स्नान करें।
  • एक चौकी पर कपड़ा बिछाकर शनि देव की मूर्ति विराजमान करें।
  • भगवान शनि को पंचामृत से स्नान करवाएं।
  • इसके बाद व्रत का संकल्प लें।
  • उन्हें फूल माला अर्पित करें।
  • सरसों के तेल का दीपक जलाकर आरती करें और शनि चालीसा का पाठ भी करें।
  • शनि मंत्रों का जाप करना फलदायी होता है।
  • प्रभु को विशेष चीजों का भोग लगाएं
  • अंत में असहाय लोगों को भोजन अवश्य कराएं।

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