Shani Jayanti Ke Upay : हिन्दू धर्म में ज्येष्ठ माह बड़ा महत्व रखता है। ज्येष्ठ माह में वट सावित्री व्रत के अलावा, शनि जयंती मनाई जाती है, जो इस बार शनिवार 16 मई को पड़ रही है। शनिदेव को प्रसन्न करने और शनि दोष जैसे साढ़ेसाती और ढैय्या आदि से राहत पाने के लिए शनि जयंती का दिन उत्तम है। इस दिन पर शाम के समय सरसों के तेल का दीपक इन प्रमुख जगहों पर जलाने से आपको अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।
शास्त्रों के अनुसार,शनि जयंती के दिन किसी नजदीकी शनि मंदिर में जाकर शनिदेव की प्रतिमा या शिला के सामने सरसों के तेल दीपक जलाना चाहिए। इससे शनि देव प्रसन्न होते हैं और जातक को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। इसके साथ ही आप इस दिन पर हनुमान जी की आराधना कर उनके समक्ष दीपक जला सकते हैं, तो शनि दोष से राहत का एक बहुत प्रभावी उपाय माना जाता है।
शनि जयंती के मौके पर (Shani Jayanti Deepak Upay) शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
शमी के पौधे का संबंध शनिदेव से माना जाता है। इसलिए शनि जयंती की शाम को यदि घर में शमी का पौधा हो, तो उसके पास दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और आर्थिक तंगी दूर होने में मदद मिलती है।
शनि जयंती की शाम को घर के मुख्य द्वार पर बाहर की ओर सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इस दिन चौमुखी दीपक जलाने से विशेष लाभ मिलने की भी मान्यता है।
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शनिदेव को दक्षिण दिशा का स्वामी माना जाता है। इसके साथ ही दक्षिण दिशा को यमराज और पितरों की दिशा माना जाता है, इसलिए शनि जयंती के खास मौके पर इस दिशा में दीपक जरूर जलाएं। ऐसा करने से आपको नकारात्मक ऊर्जा के साथ-साथ पितृ दोष से भी राहत मिलती है।