Vishwakarma Puja Kab Hai : हर साल की तरह इस बार भी भगवान विश्वकर्मा का जन्मोत्सव पूरे देशभर में खासतौर पर, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, असम और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में बेहद धूमधाम से मनाया जाएगा। यह पर्व हर साल कन्या संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है, जो सौर कैलेंडर पर आधारित एक निश्चित तिथि है।
यह त्योहार विशेष रूप से कारीगर, फर्नीचर बनाने वाले, मशीनरी और कारखानों से जुड़े काम करने वाले लोगों के लिए खास महत्व रखता है। इस दिन लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ-साथ अपनी मशीनों और उपकरणों की भी पूजा करते हैं। आइए जानें इस बार 16 या 17 सितंबर कब मनाया जाएगा विश्वकर्मा पूजा का त्योहार।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा का पावन पर्व कन्या संक्रांति के दिन मनाया जाता है। 17 सितंबर की सुबह 04:28 बजे कन्या संक्रांति का क्षण होगा, जिसके कारण यह समय बेहद शुभ माना जा रहा है। इस समय सूर्य देव सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में आएंगे।
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05:58 बजे से सुबह 06:44 बजे तक।
प्रातः सन्ध्या- सुबह 06:21 बजे से सुबह 07:30 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 01:20 बजे से दोपहर 02:10 बजे तक।
विजय मुहूर्त- दोपहर 03:50 बजे से शाम 04:40 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त- रात 07:59 बजे से रात 08:23 बजे तक।
सायाह्न सन्ध्या- रात 07:59 बजे से रात 09:09 बजे तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग- सुबह 07:30 बजे से शाम 04:23 बजे तक।
रवि योग- सुबह 07:30 बजे से शाम 04:23 बजे तक।
भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए आवश्यक सामग्री की सूची नीचे दी गई है- जो इस प्रकार हैं-
भगवान विश्वकर्मा की फोटो
सुपारी
हल्दी
फूल और फूल माला
लॉन्ग
मौली
रोली
पीला अश्वगंधा
लकड़ी की चौकी
पीला कपड़ा
मिट्टी का कलश
नवग्रह
जनेऊ
इलायची
इत्र
सुखा
गोला
दही
फूल
खीरा
जटा वाला नारियल
धुपबत्ती
अक्षत
फल
हवन कुंड
आम की लकड़ी
मिठाई
कपूर
देसी
घी
धार्मिक एवं लोक मान्यता के अनुसार,इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करने के बाद कार्यस्थल की साफ-सफाई करें और गंगाजल छिड़क कर शुद्ध करें।
अब एक चौकी में लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाकर अष्टदल कमल बनाकर एक कलश और भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या मूर्ति को स्थापित करें।
इसके बाद सभी यंत्रों व औजारों पर रोली, चंदन और हल्दी लगाकर धूप-दीप से आरती उतारें। भगवान विश्वकर्मा को फल, फूल और मिठाई आदि का भोग लगाएं। पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें और परिवारजनों में वितरित करें।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा ।। 1 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।। 2।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्ध आई ।। 3 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बन कर दूर दुःख कीना ।। 4 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
जब रथकार दम्पति, तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी ।। 5 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे ।
द्विभुज, चतुर्भुज, दसभुज, सकल रूप साजे ।। 6 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जाये, अटल शांति पावे ।। 7 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।
श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे ।।
कहत गजानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे ।। 8 ।।
ओम जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ।