दूसरा खरमास (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

दूसरा खरमास कब लगेगा? भूलकर भी न करें ये काम, वरना बढ़ सकती हैं परेशानियां

Kharmas Astrology Meaning: साल 2026 का दूसरा खरमास 14 मार्च से शुरू होकर 13 अप्रैल तक रहेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य करना अशुभ माना जाता है।

सीमा कुमारी

Second Kharmas Kab Hai 2026: हिन्दू धर्म में खरमास को शुभ नहीं माना जाता है। हिन्दू मान्यता के अनुसार, खरमास के दौरान किसी भी तरह के शुभ एवं मांगलिक काम करने की सख्त मनाही होती हैं। खरमास साल में दो बार लगता है। खरमास तब लगता है जब सूर्य देव गुरु बृहस्पति की राशि धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं। गुरु बृहस्पति की राशि में सूर्य का प्रभाव कम हो जाता है।

यही कारण है कि खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश या अन्य मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि इस साल दूसरा खरमास कब लगेगा? क्यों खरमास की अवधि को अशुभ माना जाता है?

साल 2026 का दूसरा खरमास कब है?

हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में दूसरा खरमास 14 मार्च से शुरू होकर 13 अप्रैल 2026 तक रहेगा। इस दौरान सूर्य देव मीन राशि में गोचर करेंगे। खरमास की अवधि सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश से जुड़ी होती है। इससे पहले पहला खरमास 16 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 14 जनवरी 2026 तक रहा था, जिसका समापन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ हुआ।

खरमास में क्या करना अशुभ

ज्योतिषयों के अनुसार, खरमास में भूलकर भी विवाह नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान विवाह करने से दांपत्य जीवन में परेशानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही भावनात्मक दूरी बन सकती है।

इसके अलावा, खरमास के दौरान गृह प्रवेश या घर नहीं बनवाना चाहिए। इन कामों को करना अशुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, वर्जित कामों को करने से घर में सुख-शांति का वास नहीं होता है। साथ ही परिवार के सदस्यों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

खरमास में नए काम की शुरुआत करने से बचाना चाहिए। इससे जीवन में आर्थिक हानि हो सकती है। साथ ही काम में सफलता नहीं मिलती है। खरमास में मुंडन संस्कार करना वर्जित है।

खरमास में क्या करना शुभ

खरमास के दौरान ब्राह्मणों, गरीबों और जरूरतमंदों को अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। इससे जातक को शुभ फल की प्रापित होती है और हमेशा अन्न-धन के भंडार भरे रहते हैं।

रोजाना सूर्य देव को अर्घ्य दें। इस दौरान सूर्य देव से जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें।

सुबह स्नान करने के बाद विष्णु जी की पूजा करें। भोग में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें।

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