संतान सप्तमी  (सौ. AI)
धर्म

संतान सप्तमी 2026: कब है संतान की रक्षा वाला ये खास व्रत? नोट कर लें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Santan Saptami Shubh Muhurat: धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, संतान सप्तमी दिन व्रत रखने व विधि पूर्वक शिव-पार्वति की पूजा-अर्चना करने से निसंतान दंपति को संतान सुख का वरदान मिलता है।

सीमा कुमारी

Santan Saptami Kab Hai: हिंदू धर्म में संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए कई तरह के व्रत रखे जाते हैं। इन व्रतों में संतान सप्तमी का पावन पर्व भी हैं। जो हर साल भादो महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रखा जाता है। पंचांग के अनुसार, इस साल संतान सप्तमी की तिथि 17 सितंबर 2026 की सुबह 10:48 बजे से शुरू होकर 18 सितंबर को दोपहर 1:01 बजे तक रहेगी।

निसंतान दंपति के लिए बड़ा फलदायी, ये व्रत

संतान सप्तमी का व्रत हिंदू धर्म में खास महत्व रखता है। धर्म शास्त्रों में बताया गया है कि, इस दिन व्रत रखने व विधि पूर्वक शिव-पार्वति की पूजा-अर्चना करने से निसंतान दंपति को संतान सुख का वरदान मिलता है।

साथ ही उन्हें महादेव और मां पार्वती के आर्शीवाद से कार्तिकेय और श्रीगणेश जैसी तेजस्वी संतान की प्राप्ति होती है। वहीं जिन महिलाओं को संतान प्राप्त है उन संतानों की आयु लंबी व उन्नति प्राप्त होती है।

संतान सप्तमी की पूजा का मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, इस वर्ष संतान सप्तमी का व्रत 18 सितंबर 2026 को मनाया जा रहा है। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 : 45 मिनट से लेकर 9: 18 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में भी पूजा करना फलदायी माना गया है और यह मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 51 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 40 मिनट तक रहेगा।

क्या है संतान सप्तमी की पूजा विधि?

  • संतान सप्तमी के दिन सुबह ज्ल्दी उठकर, स्नानादि करके साफ कपड़े पहनें और भगवान शिव और मां गौरी के समक्ष प्रणाम कर व्रत का संकल्प लें।

  • अब अपने व्रत की शुरुआत करें और निराहार रहते हुए शुद्धता के साथ पूजन का प्रसाद तैयार कर लें।

  • इसके लिए खीर-पूरी व गुड़ के 7 पुए या फिर 7 मीठी पूरी तैयार कर लें।

  • यह पूजा दोपहर के समय तक कर लेनी चाहिए। पूजा के लिए धरती पर चौक बनाकर उस पर चौकी रखें और उस पर शंकर पार्वती की मूर्ति स्थापित करें।

  • अब कलश स्थापित करें, उसमें आप के पत्तों के साथ नारियल रखें।

  • दीपक जलाएं और आरती की थाली तैयार कर लें जिसमें हल्दी, कुंकुम, चावल, कपूर, फूल, कलावा आदि अन्य सामग्री रखें।

  • अब 7 मीठी पूड़ी को केले के पत्ते में बांधकर उसे पूजा में रखें और संतान की रक्षा व उन्नति के लिए प्रार्थना करते हुए पूजन करते हुए भगवान शिव को कलावा अर्पित करें।

  • पूजा करते समय सूती का डोरा या चांदी की संतान सप्तमी की चूडी हाथ में पहननी चाहिए।

  • यह व्रत माता -पिता दोनो भी संतान की कामना के लिए कर सकते हैं।

  • पूजन के बाद धूप, दीप नेवैद्य अर्पित कर संतान सप्तमी की कथा पढ़ें या सुनें और बाद में कथा की पुस्तक का पूजन करें।

  • व्रत खोलने के लिए पूजन में चढ़ाई गई मीठी सात पूड़ी या पुए खाएं और अपना व्रत खोलें।

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