साल की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी (सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

रविवार को है, साल की अंतिम 'मासिक दुर्गाष्टमी' इस विशेष मुहूर्त में करें पूजा

Significance of Durgashtami:साल की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी रविवार को पड़ रही है। जानिए पूजा का विशेष मुहूर्त, विधि और मां दुर्गा की कृपा से कष्ट दूर करने की मान्यता।

सीमा कुमारी

Masik Durgashtami 2025: 28 दिसंबर को साल 2025 की आखिरी मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जा रहा है। हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाने वाला मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत हिंदू धर्म में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

यह मां दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है। यह दिन मां दुर्गा को खुश करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए बहुत शुभ माना जाता है। साल 2025 अब अपने अंतिम पड़ाव पर है, ऐसे में साल की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी (Masik Durgashtami 2025) का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि यह साल के समापन पर मां दुर्गा की कृपा पाने का एकमात्र अवसर है। आइए जानते हैं साल 2025 की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी की सही तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि।

साल की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी की तिथि

धार्मिक पंचांग के अनुसार, मासिक दुर्गाष्टमी शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। साल की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी वही होगी जो वर्ष के अंतिम महीने में आने वाली शुक्ल अष्टमी के दिन पड़ती है। तिथि की शुरुआत और समाप्ति चंद्र गणना पर निर्भर करती है, इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग या कैलेंडर देखना शुभ माना जाता है।

साल की अंतिम दुर्गाष्टमी का आध्यात्मिक महत्व

साल की अंतिम दुर्गाष्टमी का बहुत ज्यादा महत्व है। दिसंबर की यह दुर्गाष्टमी हमें बीते हुए साल की गलतियों के लिए क्षमा मांगने का अवसर देती और आने वाले नए साल की शुरुआत के लिए शुभता देती है। इस दिन कन्या पूजन करना या छोटी कन्याओं को कुछ उपहार देना विशेष फलदायी माना जाता है। इससे देवी कृपा मिलती है।

मां दुर्गा को शक्ति, साहस और रक्षा की देवी माना जाता है। मान्यता है कि मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत रखने से:

मानसिक और शारीरिक बल प्राप्त होता है।

भय और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है।

पारिवारिक सुख-शांति बनी रहती है।

संकटों से उबरने की शक्ति मिलती है।

विशेष रूप से साल की अंतिम मासिक दुर्गाष्टमी को आत्मशुद्धि और नए संकल्प का दिन माना जाता है।

पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
  • घर के पूजा स्थान को स्वच्छ करें।
  • मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • दीपक जलाकर रोली, अक्षत, फूल और फल अर्पित करें।
  • दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या सरल मंत्रों का पाठ करें।
  • अंत में मां दुर्गा की आरती करें और क्षमा प्रार्थना करें।
  • जो लोग व्रत रखते हैं, वे फलाहार कर सकते हैं और शाम को पूजा के बाद व्रत खोलते हैं।

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