Raksha Bandhan Puja Vidhi : रक्षाबंधन हिंदू संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र और भावपूर्ण त्योहार है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम, विश्वास और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है। यह पर्व श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो इस वर्ष 28 अगस्त को पड़ रहा है। रक्षाबंधन सिर्फ भाई की कलाई पर राखी बांधने का त्योहार नहीं है, बल्कि इस दिन बहनें भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना भी करती हैं।
धार्मिक मान्यताओं में इस दिन किए गए कुछ पूजा-पाठ और उपायों को शुभ माना गया है। अगर आप भी रक्षाबंधन पर भाई की सलामती और परिवार की खुशहाली के लिए कुछ खास करना चाहती हैं, तो ये उपाय अपना सकती हैं। तो आइए बिना देर किए जानते हैं इन उपायों के बारे में।
अक्षत का तिलक
भाई को रोली या चंदन का तिलक लगाते समय उस पर साबुत अक्षत चावल जरूर लगाएं, जिससे तिलक अक्षय हो और लंबी आयु मिले।
राखी बांधते समय धागे में तीन गांठ लगाएं। पहली गांठ भाई की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए मानी जाती है।
भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने से पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश को राखी अर्पित करें, इससे सभी बाधाएं दूर होती हैं।
रक्षाबंधन की सुबह शिव मंदिर जाकर जल, कच्चा दूध और बेलपत्र चढ़ाकर भाई की दीर्घायु की कामना करें।
राखी बांधते समय "येन बद्धो बलि राजा..." मंत्र का उच्चारण करें, जो सुरक्षा कवच का काम करता है।
भाई-बहन मिलकर गाय को हरी घास या रोटी खिलाएं, जिससे सुख-समृद्धि और रिश्ते में मिठास आती है।
कृष्ण और द्रौपदी
महाभारत काल में जब श्री कृष्ण की उंगली कट गई थी, तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्ला फाड़कर उनकी उंगली पर बांधा था। इसके बदले भगवान कृष्ण ने चीरहरण के समय उनकी लाज बचाकर भाई का धर्म निभाया था।
इंद्रऔर इंद्राणी
पुराणों के अनुसार, देवासुर संग्राम के समय देवताओं की विजय के लिए इंद्राणी (शची) ने इंद्रदेव की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा था।
बलि और माता लक्ष्मी
भगवान विष्णु द्वारा राजा बलि को दिए वचन के बाद माता लक्ष्मी ने बलि को राखी बांधकर विष्णु जी को वापस वैकुण्ठ जाने का वरदान मांगा था।