भगवान शिव  (सौ.जैमिनी)
धर्म

Pradosh Vrat 2026: 24 या 25 अगस्त, कब है सावन का आखिरी प्रदोष? एक तारीख बदल सकती है पूजा का पूरा हिसाब

Lord Shiva: सावन का आखिरी प्रदोष व्रत 24 या 25 अगस्त को लेकर लोगों में असमंजस है। जानें प्रदोष व्रत की सही तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, प्रदोष काल का समय और भगवान शिव की पूजा से जुड़े जरूरी नियम।

सीमा कुमारी

Last Pradosh Of Sawan: कल 25 अगस्त को सावन महीने का आखिरी प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह व्रत महीने में दो बार पड़ता है। इस तरह से एक साल में कुल 24 या 25 प्रदोष व्रत होते हैं। जब यह व्रत मंगलवार में पड़ता है तो भौम प्रदोष व्रत कहलता हैं। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है।

मान्यता है कि प्रदोष काल में श्रद्धा पूर्वक पूजा, व्रत और शिव आराधना करने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि के साथ मनोकामनाएं पूरी होने के योग बनते है।

सावन महीने का आखिरी प्रदोष व्रत कब है?

पंचांग के अनुसार, सावन महीने का आखिरी प्रदोष व्रत इस वर्ष, 25 अगस्त 2026, मंगलवार को पड़ रहा है। मंगलवार के दिन पड़ने के कारण यह भौम प्रदोष कहलाएगा। धार्मिक मान्यताओं अनुसार भौम प्रदोष व्रत रखने से कर्ज से मुक्ति मिलती है, भूमि-भवन से जुड़े विवादों का निवारण हो जाता है और शारीरिक बल में वृद्धि होती है। साथ ही मंगल ग्रह से जुड़े नकारात्मक प्रभावों से खत्म हो जाते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त

ज्योतिष पंचांग के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत पूजा का शुभ मुहूर्त 25 अगस्त 2026 की शाम 06:51 से रात 09:04 बजे तक रहेगा। त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त 2026 की सुबह 06:20 से शुरू होकर 26 अगस्त की सुबह 07:59 बजे तक रहेगी।

भौम प्रदोष व्रत पर कैसे करें पूजा ?

प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें।

पूजा स्थल यानि घर की मंदिर को अच्छे से सफाई करके भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद शिव परिवार का पूजन करें और भगवान शिव पर बेलपत्र, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें।

फिर प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें। पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ जरूर करें। शाम को पूजन के बाद ही अपना उपवास खोलें।

भौम प्रदोष व्रत का महत्व

मंगलवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को भौम प्रदोष व्रत कहते हैं। यह व्रत देवों के देव भगवान शिव, माता पार्वती और संकटमोचन हनुमान जी को समर्पित है। इस दिन प्रदोष काल (संध्या बेला) में शिव पूजा करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है, कुंडली का मंगल दोष शांत होता है, और जीवन में साहस, बल व आरोग्य की प्राप्ति होती है।

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