Shradh Ka Khana Kise Nahi Khilaye: इस साल 2026 पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर, शनिवार से हो रही है और समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। जैसा कि जानते हैं कि, पितृपक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा जताने का खास समय बताया गया है।
इस दौरान हर कोई अपने पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण के साथ ब्राह्मण भोज भी करवाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध का भोजन किसे कराया जाए और किसे नहीं इसका भी विशेष महत्व बताया गया हैं।
धर्मग्रंथों में श्राद्ध का भोजन हर किसी के लिए शुभ नहीं माना गया है, क्योंकि श्राद्ध का भोजन पितरों के नाम से बनाया जाता हैं। आखिर क्यों नहीं करना चाहिए श्राद्ध का भोजन?
धर्मग्रंथों में श्राद्ध का भोजन छल-कपट करने वाले लोगों को भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
इसके अलावा, चोर और अपराधी को भी श्राद्ध का भोजन नहीं करना चाहिए।
जो लोग अपने माता-पिता, गुरु या बड़ों का सम्मान नहीं करते है। उन्हें भी श्राद्ध का भोजन नहीं करना चाहिए।
जो धार्मिक और सात्विक नियमों के विपरीत मार्ग पर चलते हैं।
शास्त्रों और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध का भोजन मुख्य रूप से आमंत्रित ब्राह्मणों, गाय, कौवे, कुत्ते और चींटी आदि को कराने का विधान है। आम लोगों या घर के सदस्यों द्वारा इसे सामान्य भोजन की तरह ग्रहण करने को लेकर अलग-अलग मत हैं।
श्राद्ध का भोजन सबसे पहले योग्य ब्राह्मणों को कराया जाता है, क्योंकि उन्हें पितरों का प्रतिनिधि माना गया है। इसके अलावा श्राद्ध का भोजन मामा, नाना पक्ष के संबंधियों और गुरु भी श्राद्ध भोजन कर सकते है। भांजे-भांजियों को भोजन कराने की भी परंपरा कई जगह बतााई गई है।
धर्मशास्त्रीय परंपराओं में श्राद्ध का भोजन बनाते समय शुद्धता का पूरा ध्यान रखना बहुत जरूरी हैं। श्राद्ध में सिर्फ भोजन करने वाले व्यक्ति का ही नहीं, बल्कि भोजन की शुद्धता और तैयारी का भी महत्व होता हैं। धार्मिक परंपरा में शुद्ध जल से ताजाा भोजन तैयार करने पर जोर दिया गया हैं। श्राद्ध के भोजन में आमतौर पर लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं किया जाताा और भोजन सात्विक रखा जाता हैं।