अंकिता पटेल
2026 में मुख्य पितृपक्ष श्राद्ध 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक हैं और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या होगी।
हिंदू परंपरा में कौए को पितरों से जुड़ा पक्षी माना जाता है, इसलिए श्राद्ध में उसे भोजन कराने की परंपरा है।
श्राद्ध का भोजन कौए को खिलाना पूर्वजों के प्रति सम्मान और श्रद्धा व्यक्त करने की एक पारंपरिक विधि मानी जाती है।
मान्यता है कि कौए का भोजन ग्रहण करना पितरों की प्रसन्नता का शुभ संकेत माना जाता है।
कौए का भोजन न करना किसी अनहोनी का संकेत नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि पक्षी का व्यवहार प्राकृतिक कारणों पर निर्भर करता है।
पितृपक्ष में कई परिवार मांस, मछली और अंडे से दूरी रखते हैं और शाकाहारी भोजन को प्राथमिकता देते हैं। धार्मिक परंपराओं में प्याज और लहसुन को राजसिक-तामसिक माना जाता है, इसलिए इनसे परहेज किया जाता है।
पितृपक्ष को संयम और श्रद्धा का समय मानने के कारण शराब, तंबाकू और अन्य नशीली चीजों से बचने की परंपरा है।
पितृपक्ष में भोजन के नियमों से अधिक महत्वपूर्ण पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और कृतज्ञता का भाव माना जाता है।
धार्मिक मान्यता में कौए का संबंध यमराज और पितरों से जोड़ा गया है, इसलिए इसे संदेशवाहक माना जाता है।