Parama Ekadashi Religious Significance: हिंदू धर्म में परमा एकादशी का खास महत्व बताया गया है। इसे बहुत ही दुर्लभ तिथि माना जाता है क्योंकि यह एकादशी हर साल नहीं आती है बल्कि 3 साल में एक बार आती है। इस साल परमा एकादशी 11 जून, गुरुवार को पड़ रही है।
वास्तु गुरु और ज्योतिष एक्सपर्ट मान्या के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम रूप की पूजा और विधिपूर्वक व्रत करने से घर से अशांति, क्लेश, रोग और दरिद्रता दूर होती है। साथ ही, मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसे में आइए जानते है परमा एकादशी व्रत की विधि और इस दिन कौन-कौन से कार्य जरूर करने चाहिए?
धर्म ग्रथों में बताया है कि,एकादशी तिथि के दिन केले के मूल में शालिग्राम या भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्थापित करके पूजा करनी चाहिए। ऐसा करना से आर्थिक समस्याएं कम होने लगती हैं।
वास्तु गुरु और ज्योतिष एक्सपर्ट मान्या के अनुसार, परमा एकादशी पर गाय को हरा चारा या रोटी अवश्य खिलानी चाहिए। ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और पितृ दोष से मुक्ति मिल सकती है।
शाम के समय तुलसी के पौधे के पास एक घी का दीपक जलाएं और साथ ही, उनकी परिक्रमा करें। हालांकि, ध्यान रखें की इस दिन तुलसी के पौधे को स्पर्श नहीं करना चाहिए। न ही एकादशी पर तुलसी के पत्ते तोड़ने चाहिए।
एकादशी के दिन भगवान विष्णु का दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।
परमा एकादशी पर किसी जरूरतमंद या गरीब व्यक्ति को अपने सामर्थ्य अनुसार पीले कपड़े, पीले फल या अनाज का दान करना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
परमा एकादशी की पावन दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
इसके बाद घर के मंदिर या पूजा स्थल को शुद्ध कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
भगवान को पीले पुष्प, धूप, दीप, चंदन, पंचामृत और फल अर्पित करें।
श्रीहरि को पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं तथा उसमें तुलसी दल अवश्य रखें, क्योंकि तुलसी के बिना भगवान विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते।
पूजा के पश्चात परमा एकादशी व्रत कथा का श्रवण करें तथा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस रात्रि जागरण का विशेष महत्व है।
भक्तजन भजन-कीर्तन, मंत्र जाप और भगवान के ध्यान में रात्रि व्यतीत करते हैं।
परमा एकादशी पर ब्राह्मणों, जरूरतमंदों अथवा दीन-हीन, असहाय लोगों को भोजन एवं दान-दक्षिणा देकर व्रत का पारण किया जाता है।