Parama Ekadashi Significance: सनातन धर्म में अधिक मास का बड़ा महत्व बताया गया है। अधिक मास में पड़ने वाली परम एकादशी इस बार 12 जून को मनाई जा रही है। यह एकादशी हर तीन साल में एक बार आती है। जिस वजह से इस शुभ तिथि का महत्व बढ़ जाता है।
धर्म शास्त्रों में इस दिन भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान बताया गया है। साथ ही अन्न-धन समेत आदि चीजों का दान करने का।
धार्मिक ग्रथों में एकादशी का व्रत करने से साधक के जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही सभी पापों से छुटकारा मिलता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन कुछ गलतियों को करने से साधक को जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है और भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं।
एकादशी के दिन भूलकर भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाने से व्यक्ति को अगला जन्म में रेंगने वाले जीव की योनि मिलता है। इसलिए इस दिन चावल खाना वर्जित माना गया है। एकादशी के दिन गेहूं, जौ, दालें और किसी भी प्रकार के अन्न का सेवन किया जा सकता है।
एकादशी के दिन चावल के सेवन के अलावा, तुलसी के पत्ते भी नही तोड़ने चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करने चाहिए, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते भूलकर भी न तोड़ें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस गलती को करने से मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं और पूजा सफल नहीं होती है। इसलिए एकादशी से एक दिन पहले ही तुलसी के पत्ते तोड़कर रख लें।
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एकादशी के दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन करें। तामसिक भोजन करने से साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होगा और भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं।
एकादशी के दिन किसी पर क्रोध न करें। किसी के बारे में गलत न सोचें। किसी की निंदा न करें। ऐसा माना जाता है कि इन गलतियों को करने से व्रत का फल नष्ट हो जाता है।