Navratri Seventh Day Puja: चैत्र नवरात्रि का आज सातवां दिन मां कालरात्रि को समर्पित है। इस दिन मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कालरात्रि की साधना और व्रत करने से साधक को सभी भय से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ये देवी दुर्गा की 7वीं शक्ति हैं।
जिन लोगों को अनजाना भय सताता है, मानसिक तनाव बना रहता है, उन लोगों को कालरात्रि की पूजा करनी चाहिए। धर्मशास्त्रों में इन्हें दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाली और भय को दूर करने वाली देवी बताया गया है। आइए जानते है मां कालरात्रि की पूजा विधि, भोग, मंत्र और नियम जान लें.
मां कालरात्रि की पूजा का शुभ मुहूर्त का समय
सुबह का शुभ समय: प्रातः 06:20 बजे से प्रातः 08:45 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक।
कैसे करें मां कालरात्रि की पूजा विधि
- सप्तमी की पूजा अक्सर रात के समय में करना अधिक फलदायी माना जाता है, लेकिन आप माता का
- पूजन सुबह के समय भी कर सकती हैं।
- इसके लिए आपको सुबह जल्दी उठकर स्नान करना है।
- इसके बाद गहरे रंग के कपड़ों को पहनना है।
- फिर आपको मां कालरात्रि के सामने नीले रंग का वस्त्र रखना है।
- मंदिर में दीप प्रज्वलित करें और मां का ध्यान करें और हाथ में जल लेकर पूजा को धारण करें।
- मां को लाल और नीले रंग के फूल अर्पित करना बहुत शुभ होता है। उन्हें कुमकुम और अक्षत लगाएं।
- इसके बाद मां कालरात्रि की कथा को पढ़ें।
- कथा को पढ़ने के बाद माता की आरती करें।
- फिर मां कालरात्रि को गुड़ का भोग लगाएं। ऐसा इसलिए क्योंकि मां को गुड़ बेहद प्रिय है।
- इसके बाद इस प्रसाद को अन्य लोगों को भी बांटे।
- अंत में कपूर जलाकर पूरे घर में दिखाएं। इससे नकारात्मकता दूर होगी।
मां कालरात्रि की पूजा का आध्यात्मिक लाभ
- ज्योतिषयों के अनुसार, जिन जातकों की कुंडली में शनि का अशुभ प्रभाव है, उनके लिए मां कालरात्रि की पूजा रामबाण है।
- कोर्ट-कचहरी या गुप्त शत्रुओं से परेशान लोगों को देवी का आशीर्वाद निर्भय बनाता है।
- देवी का 'शुभंकरी' स्वरूप हमारे भीतर के क्रोध, ईर्ष्या और मोह जैसे 'रक्तबीजों' का अंत करता है।
- इस तरह से आप भी मां कालरात्रि का पूजन और मंत्रों का उच्चारण कर सकती हैं।
- इससे आपके जीवन में सकारात्मकता का संचार होगा।