Vijayadashami Spiritual Meaning: नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-आराधना की जाती है। नौ दिनों के उत्सव के बाद दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है। आमतौर पर इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है, लेकिन सद्गुरु इस दिन को एक गहरे आध्यात्मिक नजरिए से समझाते हैं।
उनके अनुसार, विजयादशमी केवल किसी बाहरी शत्रु पर जीत हासिल करने का दिन नहीं, बल्कि अपने भीतर के शत्रु से आगे बढ़ने का भी है।
सद्गुरु का मानना है कि नवरात्रि के नौ दिनों को तीन चरणों में समझा जा सकता है। पहले तीन दिन मां दुर्गा, अगले तीन दिन मां लक्ष्मी और अंतिम तीन दिन मां सरस्वती से जुड़े हैं। आसान भाषा में, शक्ति, समृद्धि और ज्ञान। योग दर्शन में इनसे जुड़े भावों को तमस, रजस और सत्त्व जैसे गुणों से जोड़ा जाता है।
विजयादशमी का अर्थ है विजय का दिन। इस दिन को रावण पर भगवान राम की जीत और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय के रूप में मनाया जाता है। सद्गुरु के अनुसार, शक्ति, समृद्धि और ज्ञान जीवन के महत्वपूर्ण पहलू हैं, लेकिन केवल इन्हें हासिल करना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है। इंसान को यह भी समझना चाहिए कि कहीं वह अपनी उपलब्धियों, इच्छाओं और क्षमताओं के बीच में बंधा हुआ तो नहीं है। इनसे आगे बढ़ने की समझ को ही आध्यात्मिक विजय माना जाता है।
जीवन में जीत का मतलब हर बार किसी प्रतियोगिता को जीतना नहीं है। सफल होना, लक्ष्य हासिल करना या किसी मुश्किल को पार करना भर ही जीत की परिभाषा नहीं होती है। इस नजरिए से यह जानना जरूरी है कि क्या आपकी इच्छाएं और उपलब्धियां आपके फैसलों को नियंत्रित कर रही हैं। अपनी सीमाओं को पहचानना और उनसे आगे बढ़ने की कोशिश करना भी इस दिन के संदेश का हिस्सा है।
नवरात्रि के नौ दिन शक्ति, समृद्धि और ज्ञान जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है। सद्गुरु की व्याख्या के अनुसार, जीवन में केवल अधिक शक्ति, धन या ज्ञान हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। इनके प्रति अपने लगाव को समझना और इन्हें अपनी पूरी पहचान न बनने देना भी जरूरी है।
इस तरह विजयादशमी का संदेश केवल बाहरी जीत तक सीमित नहीं है। यह खुद को समझने, अपनी इच्छाओं पर दोबारा से विचार करने और अपनी उपलब्धियों से परे अपनी पहचान तलाशने की प्रेरणा भी देता है।