Chidambaram Nataraja Temple (Source. X) 
धर्म

भारत का सबसे रहस्यमयी शिव मंदिर, जहां इंसानी शरीर से जुड़ा है हर रहस्य, विज्ञान भी मानता है चमत्कार

Mysterious Temple: भारत में देवी-देवताओं के असंख्य मंदिर हैं, लेकिन कुछ मंदिर ऐसे हैं जो अपनी रहस्यमयी बनावट, वैज्ञानिक तथ्यों और आध्यात्मिक गहराई के कारण सबको चौंका देते हैं।

सिमरन सिंह

Chidambaram Nataraja Temple: भारत में देवी-देवताओं के असंख्य मंदिर हैं, लेकिन कुछ मंदिर ऐसे हैं जो अपनी रहस्यमयी बनावट, वैज्ञानिक तथ्यों और आध्यात्मिक गहराई के कारण सबको चौंका देते हैं। इन्हीं में से एक है भगवान शिव को समर्पित थिल्लई नटराज मंदिर, जिसे चिदंबरम नटराज मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि विज्ञान और अध्यात्म का अद्भुत संगम भी है।

कहां स्थित है चिदंबरम नटराज मंदिर?

यह रहस्यमयी मंदिर दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित है। चिदंबरम शहर के बीचों-बीच बना यह मंदिर सदियों से श्रद्धालुओं और शोधकर्ताओं को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है।

भगवान शिव का अंगूठा और चुंबकीय भूमध्य रेखा

कई वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, मंदिर में विराजमान भगवान नटराज का अंगूठा दुनिया की चुंबकीय भूमध्य रेखा का प्रतीक माना जाता है। हैरानी की बात यह है कि प्राचीन तमिल विद्वान थिरुमूलर ने करीब 5000 साल पहले ही इस तथ्य का उल्लेख किया था, जिसे आज विज्ञान भी स्वीकार करता है।

पंचभूता मंदिरों में विशेष स्थान

चिदंबरम नटराज मंदिर भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह पंचभूता मंदिरों में आकाश तत्व का प्रतीक है। श्रीकालहस्ती वायु तत्व और कांची एकंबरेश्वर भूमि तत्व को दर्शाता है। ये तीनों मंदिर 79 डिग्री 41 मिनट लॉन्गिट्यूड पर एक सीधी रेखा में स्थित हैं, जिसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया जा चुका है।

मंदिर की बनावट और मानव शरीर का संबंध

  • इस मंदिर की वास्तुकला इंसानी शरीर से गहराई से जुड़ी है।
  • मंदिर में 9 प्रवेश द्वार हैं, जो मानव शरीर के 9 द्वारों का प्रतीक हैं।
  • छत पर लगी 21,600 सोने की टाइलें इंसान द्वारा एक दिन में ली जाने वाली सांसों को दर्शाती हैं।
  • वहीं 72,000 सोने की कीलें मानव शरीर की कुल नाड़ियों (Nerves) का प्रतीक मानी जाती हैं।

गर्भगृह और मानव हृदय का रहस्य

मंदिर का गर्भगृह हल्का सा बाईं ओर झुका हुआ है, जो मानव हृदय का प्रतीक है। इस पवित्र स्थान को पोन्नम्बलम कहा जाता है। यहां तक पहुंचने के लिए पंचतर्शर पदी नाम की पांच सीढ़ियां चढ़नी होती हैं "सि, वा, य, न, म"।

नटराज का ब्रह्मांडीय नृत्य

पश्चिमी वैज्ञानिकों ने भगवान नटराज के नृत्य को "कॉस्मिक डांस" यानी ब्रह्मांडीय नृत्य कहा है। रत्नों से सजी भगवान शिव की यह प्रतिमा मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है। शिव के साथ-साथ यह मंदिर वैष्णव, शक्ति और अन्य धार्मिक परंपराओं का भी सम्मान करता है।

चोल काल की अद्भुत विरासत

10वीं शताब्दी में बने इस मंदिर के समय चिदंबरम चोल वंश की राजधानी हुआ करता था। चोल शासक भगवान नटराज को अपना कुलदेवता मानते थे, और यही वजह है कि मंदिर की कला और आध्यात्मिकता आज भी जीवंत है।

आज की ताजा खबर 21 अगस्त LIVE: एक क्लिक में पढ़ें दिनभर की सारी बड़ी खबरें

जंतर-मंतर पर आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन पर पुलिस का एक्शन, RAF ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा, कई हिरासत में

RSS-ISI सीक्रेट मीटिंग! आंबेडकर ने PM मोदी और भागवत से पूछे सवाल, कोलंबो बैठक के 4 मुद्दों के खुलासे की मांग

असम बाढ़ पर CM हिमंता की वित्त मंत्री से अहम मुलाकात, निर्मला सीतारमण ने दिया केंद्र के सहयोग का भरोसा

Japan Delegation Varanasi: 109 सदस्यीय जापानी प्रतिनिधिमंडल पहुंचा काशी, निवेश और संस्कृति को मिलेगी नई उड़ान