मौनी अमावस्या उपाय (सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

मौनी अमावस्या पर क्या करने से खुलेगी किस्मत? क्यों है यह भाग्योदय के लिए विशेष दिन? जानिए उपाय

Spiritual Significance: मौनी अमावस्या को सनातन धर्म में अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है। इस दिन मौन व्रत, पवित्र स्नान, दान-पुण्य और विशेष उपाय करने से पापों का नाश होता है।

सीमा कुमारी

Mauni Amavasya 2026 Muhurat: मौनी अमावस्या हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र तिथियों में से एक है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस दिन मौन रहकर व्रत करने, पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने से विशेष फल मिलता है। खासतौर पर पितृ दोष से मुक्ति के लिए मौनी अमावस्या को सबसे शुभ एवं प्रभावशाली दिन माना गया है।

क्योंकि, इस दिन स्वर्ग और पृथ्वी के बीच के द्वार खुलते हैं और हमारे पूर्वज यानी कि पितृ पृथ्वी पर अपनी संतान से तर्पण और सम्मान की अपेक्षा लेकर आते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं इस दिन किए जाने कुछ प्रभावी और आसान उपाय के बारे में-

कब है साल 2026 में मौनी अमावस्या

ज्योतिष गणना के अनुसार, पंचांग के मुताबिक, इस वर्ष माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 18 जनवरी 2026 की रात 12:03 मिनट से शुरु होकर 19 जनवरी 2026 की रात 1:21 बजे मिनट तक रहेगी। परंपरा के अनुसार जिस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि विद्यमान रहती है, उसी दिन पर्व मनाया जाता है, इसीलिए मौनी अमावस्या 2026 को रविवार, 18 जनवरी 2026 के रूप में मनाया जाएगा।

मौनी अमावस्या पर कौन सा उपाय करें

  • दान से बढ़ता है पुण्य फल

सनातन धर्म में मौनी अमावस्या पर किया गया दान कई गुना फल देने वाला माना गया है। कहा जाता है कि, इस दिन अपनी क्षमता अनुसार कंबल, अनाज, गर्म वस्त्र या जरूरतमंदों को भोजन का दान अवश्य करें।

  • पीपल वृक्ष की पूजा और परिक्रमा का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या तिथि पर पीपल के वृक्ष में पितृ देवताओं का वास होता है। मौनी अमावस्या के दिन जल में काले तिल मिलाकर पीपल के पेड़ पर अर्पित करें। इसके बाद 108 बार परिक्रमा करें। इससे पितरों की कृपा मिलती है।

  • दीपदान और चींटियों को आटा खिलाएं

इस शुभ तिथि पर दीपक जलाकर किसी मंदिर या पीपल के नीचे दीपदान करना कल्याणकारी होता है। साथ ही इस दिन चींटियों को आटा या चीनी डालने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पितृ प्रसन्न होते हैं।

  • पितृ तर्पण और दान

इस दिन सुबह स्नान करने के बाद अपने पितरों के नाम से जल में काले तिल मिलाकर अर्घ्य दें। इस दिन दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद किसी गरीब या ब्राह्मण को अनाज, गर्म कपड़े या तिल के लड्डू का दान अवश्य करें।

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