Kalashtami Puja Vidhi : 9 मई, शनिवार को ज्येष्ठ महीने का पहला कालाष्टमी व्रत हैं। भगवान शिव के रौद्र रूप भगवान काल भैरव को समर्पित मासिक कालाष्टमी का व्रत हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता हैं। यदि आप पहली बार कालाष्टमी का व्रत करने वाले हैं, तो इस पूजा से जुड़े नियमों के बारे में जानना आपके लिए बेहद जरूरी है, ताकि इस दिन आपसे कोई भूल न हो और पूजा विधिपूर्वक पूरी हो सके।
कालाष्टमी के दिन कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी माना जाता है। इस दिन किसी भी जीव, खासकर कुत्ते को कष्ट नहीं पहुंचाना चाहिए, क्योंकि कुत्ता भगवान काल भैरव का वाहन माना जाता है। साथ ही झूठ बोलने, छल-कपट करने और किसी का अपमान करने से भी बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए और केवल सात्विक आहार ग्रहण करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा काल भैरव की पूजा निशिता काल यानी अर्धरात्रि में करना विशेष फलदायी माना गया है।
कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना बेहद शुभ माना जाता है। दीपक में थोड़े से काले तिल डालने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
इस पावन दिन काल भैरव को उड़द की दाल के बड़े, इमरती या हलवा-पूरी का भोग लगाने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि इससे संकट और बाधाएं दूर होती हैं।
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कालाष्टमी पर काल भैरव के मंत्रों का जाप करना अत्यंत फलदायी माना गया है। श्रद्धा और विश्वास के साथ मंत्र जाप करने से भय, शत्रु और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
ॐ भैरवाय नमः॥
ॐ ह्रीं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं॥