Hanuman Ji Ko Paan Chadhane Ke Niyam: सनातन धर्म में पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। भक्ति की शुरुआत ही पूजा-पाठ से होती है। वैदिक काल में पूजा, जप-तप और यज्ञ की परंपरा थी। आधुनिक समय में विशेष अवसरों पर यज्ञ किया जाता है, किंतु पूजा-पाठ नित्य प्रतिदिन किया जाता है।
वहीं, हर मांगलिक कार्य से पहले पूजा की जाती है। साथ ही मनोकामना पूर्ण होने पर भी पूजा, कीर्तन, जागरण आदि कराया जाता है। इन अवसरों पर सत्यनारायण भगवान की पूजा की जाती है। इस पूजा में कुल देवी, नवग्रहों समेत सभी देवी-देवताओं और भगवान श्रीहरि विष्णु जी की पूजा की जाती है। हर धार्मिक अनुष्ठान और पूजा में पान-सुपारी का उपयोग किया जाता है।
सनातन धर्म में, भगवान हनुमान को ‘संकटमोचन’ कहा जाता है यानी संकट दूर करने वाले और अपने भक्तों के दुख हरने वाले बजरंगबली। मंगलवार और शनिवार को भक्त व्रत व विशेष पूजा करते हैं। इन दिनों भक्त उन्हें सिंदूर, चमेली का तेल, दूध और पान चढ़ाते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि कालांतर में समुद्र मंथन के समय देवताओं ने पान के पत्ते का उपयोग किया था। दैविक काल से मांगलिक कार्य समेत पूजा में पान के पत्ते का उपयोग किया जाता है। पान के पत्तों में भी देवताओं को वास होता है। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अतः पूजा में पान और सुपारी चढ़ाई जाती है।
माना जाता है कि भगवान हनुमान को पान चढ़ाने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और नकारात्मक शक्तियां दूर भागती है। जिनके भी काम नहीं बनते हैं और बहुत मानसिक तनाव में रहते हैं, उनके लिए पूरी श्रद्धा और सही नियमों के साथ हनुमान जी को भेंट चढ़ाना फायदेमंद माना जाता है। साथ ही इससे खुशी, समृद्धि और सकारात्मकता का घर में वास होता है।
शनिदेव ने बजरंगबली को वचन दिया था कि उनके भक्तों को शनिदेव कभी परेशान नहीं करेंगे। शनिवार को पान चढ़ाने से शनि के कष्ट कम होते हैं और शनि दोष से मुक्ति मिलती है।
संकटमोचक को पान अर्पित करने का अर्थ है कि आपने अपनी समस्याओं का बीड़ा हनुमान जी को सौंप दिया है। इससे जीवन के बड़े से बड़े संकट टल जाते हैं।
सच्चे मन से बजरंगबली को मीठा पान चढ़ाने से नौकरी, व्यापार और निजी जीवन की रुकी हुई मनोकामनाएं पूरी होती हैं।