Guruwar Vrat Ke Niyam: हिंदू धर्म में बृहस्पति को देवगुरु माना जाता है। गुरु ही हमारे जीवन में सुख-सौभाग्य का कारक माना गया है, जिनकी पूजा और व्रत करने पर साधक का गुडलक बढ़ता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यदि आप भी इस व्रत को रखने की सोच रहे हैं, तो आपको इससे जुड़े नियम और विधि जरूर जानना चाहिए।
हिंदू मान्यता के अनुसार, देवगुरू वृहस्पति की कृपा पाने के लिए किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष में गुरुवार व्रत की शुरुआत की जा सकती है। इसके अलावा यदि पुष्य नक्षत्र के साथ इसका संयोग बने तो बहुत ज्यादा शुभ माना जाता है।
अगर आप गुरुवार के व्रत शुरू कर रहे हैं, तो ध्यान रखें कि कम से कम 16 गुरुवार का व्रत रखना चाहिए। पहले गुरुवार के दिन व्रत का संकल्प करें और फिर 16 गुरुवार तक व्रत का अनुसरण करें। इसके बाद 17 गुरुवार के दिन विधि-विधान से व्रत का उद्यापन करें या आप चाहें तो इसे आगे भी किया जा सकता हैं।
गुरुवार के दिन देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए पीले पुष्प, पीले रंग के मिष्ठान चढ़ाएं और पीला रंग का ही वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए कमल और तुलसीदल भी अर्पित करें।
ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, भाग्य और संतान का कारक माना जाता है।
जिन व्यक्तियों की कुंडली में गुरु कमजोर होता है, उनके लिए यह व्रत रामबाण माना गया है। इस एक व्रत के करने से गुरु मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं।
यह व्रत विशेष रूप से विवाह में देरी, आर्थिक तंगी और करियर में आने वाली रुकावटों को दूर करने के लिए किया जाता है। मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होता है।
मजबूत बृहस्पति व्यक्ति को समाज में सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और करियर में स्थिरता मिलती है। बृहस्पति का विधि-विधान से व्रत करने पर साधक को जीवन में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
किसी भी देवी-देवता या ग्रह को मनाने या फिर उनका आशीर्वाद पाने के लिए भक्त को उनकी प्रिय चीजों का दान करना चाहिए। यह तब ज्यादा फलदायी होता है, जब आप उनके लिए निर्धारित दिन को उनकी प्रिय वस्तु का दान करते हैं। इसलिए गुरुवार के दिन आपको गुरु ग्रह से संबंधित चीजें जैसे चने की दाल, हल्दी, केसर, पीले पुष्प, पीले वस्त्र, बेसन, बेसन से बनी मिठाई, कढ़ी, पीले चावल आदि का दान करना चाहिए।
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