Guru Ram Das Jayanti 2026: अमृतसर शहर सिख धर्म के लोगों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। अमृतसर शहर की स्थापना सिख धर्म के चौथे गुरु, गुरु राम दास जी के समय हुई थी। अमृतसर की स्थापना और इसके पवित्र सरोवर के निर्माण की कहानी सिख इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गुरु राम दास जी को अमृतसर का संस्थापक माना जाता है। उन्होंने 1574 के आसपास एक नए नगर की स्थापना की, जो शुरुआत में गुरु का चक, चक राम दास और रामदासपुर जैसे नामों से जाना गया। बाद में इसी शहर का नाम अमृतसर पड़ा।
इस जगह को चुनने की योजना तीसरे सिख गुरु, गुरु अमर दास जी के समय से शुरु हुई। सिख ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार गुरु अमर दास जी ने गुरु राम दास जी को यहां एक नए नगर और धार्मिक केंद्र को बसाने की जिम्मेदारी सौंपी। SGPC के अनुसार जमीन गांव तुंग, गिलवाली और गुमतला के जमींदारों से खरीदी गई थी, जबकि कुछ पुराने स्रोतों से पता चलता है कि इसे मुगल बादशाह अकबर ने दिया था।
गुरु राम दास जी का उद्देश्य केवल एक नया शहर बसाना नहीं था, बल्कि यहां एक ऐसा केंद्र विकसित करना था, जहां संगत एकत्रित हो सके और धर्म की स्थापना के साथ ही यहां व्यापार और अन्य सामाजिक गतिविधियां भी आगे बढ़े।
उन्होंने अलग-अलग व्यवसायों से जुड़े लोगों और व्यापारियों को यहां आकर बसने के लिए प्रोत्साहित किया। अमृतसर जिला प्रशासन के अनुसार आसपास के क्षेत्रों से 52 व्यापारिक परिवारों को यहां बसने के लिए आमंत्रित किया गया था। धीरे-धीरे यह स्थान व्यापारिक केंद्र बन गया।
गुरु राम दास जी ने यहां पवित्र सरोवर की खुदाई का काम शुरू कराया। SGPC के अनुसार अमृतसर सरोवर की खुदाई 1577 में शुरू हुई और 1581 तक इसका काम पूरा हुआ। इसी सरोवर के नाम से आगे चलकर इस शहर का नाम अमृतसर पड़ा।
गुरु राम दास जी के बाद उनके उत्तराधिकारी गुरु अर्जन देव जी ने इस शहर को और विकसित किया। उन्होंने सरोवर के बीच हरमंदिर साहिब का निर्माण कराया। 1604 में आदि ग्रंथ को हरमंदिर साहिब में स्थापित किया और बाबा बुद्ध जी को पहला ग्रंथी नियुक्त किया गया।
गुरु राम दास जी केवल अमृतसर के विकास के लिए ही नहीं, बल्कि सिख धर्म में उनके योगदान के लिए भी जाना जाता है। SGPC के अनुसार उन्होंने लावां की रचना की, जो सिख विवाह की धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। उनकी कई बाणियां गुरु ग्रंथ साहिब में भी शामिल हैं।