Buddha Teachings On Karma And Life: गौतम बुद्ध का नाम दुनिया के महान आध्यात्मिक गुरुओं में शामिल है। करोड़ों लोग उनकी शिक्षा का अनुसरण करते हैं। गौतम बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार कहा जाता है।
बुद्ध का जीवन सत्य, अहिंसा और करुणा का संदेश देता है। गौतम बुद्ध का जीवन लोगों को अज्ञानता के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर जाने का संदेश देता है। एक बार गौतम बुद्ध ने एक संबोधन में कहा था कि हर व्यक्ति के पास चार पत्नियां होती हैं, लेकिन सभी अंत तक साथ नहीं निभा पाती, केवल चौथी पत्नी ही आजीवन साथ निभाती है।
उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति की चार पत्नियां थीं और वह उनके साथ सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहा था। एक दिन वह गंभीर रूप से बीमार पड़ गया। उसे महसूस हुआ कि अब उसके जीवन के कुछ ही दिन शेष हैं। जब उसे अपनी मृत्यु निकट दिखाई देने लगी, तो उसने अपनी चारों पत्नियों को एक-एक करके अपने पास बुलाया।
सबसे पहले उसने अपनी पहली पत्नी से कहा, मैं तुमसे बहुत प्रेम करता हूं। क्या तुम मेरे साथ मृत्यु के बाद भी चलोगी? पत्नी ने उत्तर दिया, मैं तुम्हें बहुत चाहती हूं, लेकिन मृत्यु के बाद मैं तुम्हारे साथ नहीं जा सकती। हमारा साथ यहीं तक है।
इसके बाद उसने दूसरी पत्नी से वही प्रश्न पूछा। दूसरी पत्नी ने कहा, मैं घर-परिवार और दुनियादारी में इतनी व्यस्त हूं कि तुम्हारे साथ नहीं चल सकती। फिर उसने तीसरी पत्नी से भी वही सवाल किया और जवाब मिला, जब पहली और दूसरी पत्नी तुम्हारे साथ नहीं जा रहीं, तो मैं भी नहीं जा सकती।
तीनों पत्नियों के उतर से उदास होकर जब वह व्यक्ति चौथी पत्नी के पास पहुंचा, तो पहले तो उसे संकोच हुआ, क्यों उसने कभी अपनी चौथी पत्नी को महत्व ही नहीं दिया था। अंततः चौथी पत्नी से पूछा, क्या तुम मेरे साथ चलोगी?
चौथी पत्नी ने बिना दोबारा सोचे कहा, मैं तुम्हारा साथ अंत तक नहीं छोड़ूंगी। जहां तुम जाओगे, मैं भी वहीं जाऊंगी।
पहली पत्नी हमारे शरीर का प्रतीक है। हम जीवन भर इसकी देखभाल करते हैं, इसे सुंदर और स्वस्थ रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन मृत्यु के समय यही शरीर हमारा साथ छोड़ देता है।
दूसरी पत्नी धन, वैभव और संपत्ति का प्रतीक है। जीवन भर हम इन्हें कमाने में लगे रहते हैं, लेकिन मृत्यु के बाद इनमें से कुछ भी हमारे साथ नहीं जाता।
तीसरी पत्नी परिवार, मित्र और रिश्तेदारों का प्रतिनिधित्व करती है। वे जीवन भर हमारा साथ देते हैं, लेकिन मृत्यु के बाद वे केवल श्मशान तक ही साथ आते हैं।
चौथी पत्नी हमारे कर्म है। यही एकमात्र ऐसी चीज है जो मृत्यु के बाद भी हमारे साथ जाती है। हमारे अच्छे और बुरे कर्म ही भविष्य के जीवन, स्वर्ग-नरक और भाग्य का निर्माण करते हैं।