महाशिवरात्रि व्रत नियम (सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

पंचांग ने बताया 2025 की 'महाशिवरात्रि' है महाविशेष, विधिवत उपवास और पूजा से जरूर मिलेगी महादेव की विशेष कृपा, नोट कर लें ये नियम

महाशिवरात्रि का पावन तिथि भगवान शिव और मां पार्वती के मिलन का प्रतीक है। इस दिन कठिन व्रत का पालन करने से भगवान शिव की कृपा मिलती है तो आइए इस दिन का व्रत कैसे रखना है? इसके बारे में जानते हैं।

सीमा कुमारी

Mahashivratri Vrat 2025 Niyam : देवों के देव महादेव और माता पार्वती को समर्पित महाशिवरात्रि का महापर्व कुछ दिनों में आने वाला है। महाशिवरात्रि का महापर्व हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। आपको बता दें कि, महाशिवरात्रि का पर्व इसलिए भी बहुत ज्यादा शुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिन शिव और पार्वती के पावन मिलन का प्रतीक भी है।

वैसे तो शिवरात्रि हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है, लेकिन फाल्गुन माह की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व है। इसी कारण से इसे महाशिव रात्रि के नाम से भी जाना जाता है। पंचांग को देखते हुए इस साल की महाशिवरात्रि बहुत ही दुर्लभ मानी जा रही है,

ऐसे में अगर आप इस शिवरात्रि पर व्रत रख रहे हैं, तो आइए इसका सही नियम जानते हैं, जो इस प्रकार है।

शिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा के जरूरी नियम

व्रत का संकल्प

महाशिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर घर की साफ सफाई करें। उसके बाद स्नान करें और भगवान शिव की पूजा करके व्रत का संकल्प लें।

आसन पर बैठकर करे पूजा

शिवरात्रि व्रत में भगवान भोलेनाथ की पूजा करते समय कभी भी सीधे जमीन पर न बैठे। पूजा अर्चना हमेशा साफ सुथरे आसन पर बैठकर ही करें।

तांबे का बर्तन

भगवान शिव के अभिषेक के लिए कभी भी तांबे के पात्र में दूध भरकर न चढ़ाए। दूध चढ़ाने के लिए हमेशा स्टील, पीतल या चांदी के बर्तन का उपयोग ही करें।

तुलसी न चढ़ाए

भगवान भोलेनाथ को कभी भी तुलसी दल नहीं चढ़ाते जाते हैं, इसलिए शिवरात्रि की पूजा में तुलसी का उपयोग न करें।

न करें शिवलिंग की परिक्रमा

आपको बता दें कि शिवलिंग की पूजा के बाद आधी परिक्रमा करें और जल बहने वाली जलधारी को कभी भी पार न करें, बल्कि वहीं से वापस लौट जाएं।

खंडित चावल, हल्दी और कुमकुम

शिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा में खंडित चावल का प्रयोग न करें। इसके अलावा, हल्दी और कुमकुम से भी शिवलिंग का तिलक न करें।

कलश में दूध न डालें

हर शिव मंदिर में शिवलिंग के ऊपर एक कलश लगा होता है जिससे हर समय भोलेनाथ का अभिषेक होता रहता है। इस कलश में कभी भी दूध न डालें। इस कलश में केवल गंगाजल या शुद्ध जल ही डालना चाहिए।

न करें अन्न का सेवन

महाशिवरात्रि का व्रत निराहार रहकर किया जाता है. इस व्रत में पूरे दिन अन्न नहीं खाया जाता है। इसलिए इस दिन निराहार रहें और केवल फल और दूध का सेवन करें।

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