Ekadant Sankashti Chaturthi:विघ्नहर्ता और सुख-समृद्धि के दाता गणेश को समर्पित 'संकष्टी चतुर्थी' का व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस बार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि एकदंत संकष्टी चतुर्थी 5 अप्रैल 2026 को पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है।
हिन्दू धर्म में भगवान गणेश की कृपा पाने के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत सबसे शुभ माना गया हैं। इस दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से की गई पूजा व्यक्ति के सौभाग्य के द्वार खोलती है, लेकिन पूजा के दौरान अनजाने में हुई गलतियां शुभ फल के बजाय दोष का कारण बन सकती है।
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार, भगवान गणेश की पूजा में तुलसी के पत्ते चढ़ाना वर्जित बताया गया है। मान्यता है कि तुलसी अर्पित करने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता, इसलिए गणेश जी को केवल दूर्वा, लाल फूल और मोदक अर्पित करना ही शुभ माना जाता है।
संकष्टी चतुर्थी (Ekadant Sankashti Chaturthi) के व्रत में प्याज, लहसुन और मांसाहार जैसे तामसिक भोजन का सेवन वर्जित माना जाता है। इस दिन सात्विक आहार और शुद्धता का विशेष ध्यान रखें। साथ ही मन में क्रोध, ईर्ष्या या नकारात्मक विचार न आने दें और किसी से अपशब्द या ऊंची आवाज में बात करने से बचें, तभी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत पूर्ण माना जाता है। इसलिए चंद्र दर्शन से पहले अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। नियम के अनुसार पहले चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करें, उसके बाद ही व्रत खोलें, तभी व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
संकष्टी चतुर्थी के पावन दिन ब्राह्मणों का अपमान करना अशुभ माना जाता है। इस दिन सभी के प्रति सम्मान और विनम्रता का भाव रखना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से व्रत का पुण्य फल प्रभावित हो सकता है।
कहा जाता है कि गणेश जी की पीठ में दरिद्रता का वास होता है, इसलिए कभी भी उनकी पीठ के दर्शन नहीं करने चाहिए। हमेशा उनकी सामने से ही प्रार्थना करें।
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एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन दान का विशेष महत्व है। इस दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को तिल और लड्डू दान करने से अटके हुए काम बन जाते हैं। यह व्रत विशेष रूप से मानसिक शांति और संतान की रक्षा के लिए रखा जाता है।