अहोई अष्टमी के दिन न करें ये काम ( सौ.सोशल मीडिया) 
धर्म

अहोई अष्टमी व्रत में बिल्कुल न करें ये गलतियां, निष्फल जाएगी पूजा

Ahoi Ashtami Puja Muhurat:अगर आप पहली बार इस बात को कर रही हैं तो जरूर इन बातों का ध्यान रखें। धर्म शास्त्र में कुछ काम बताए गए हैं जिनको नहीं करना चाहिए। जानिए क्या नहीं करना चाहिए?

सीमा कुमारी

Ashtami Vrat Paran Niyam: संतान की सुख-समृद्धि और लंबी आयु के लिए हिंदू धर्म में कई व्रत रखे जाते हैं। जिसमें अहोई अष्टमी का व्रत भी प्रमुख हैं। आपको बता दें, पंचांग के अनुसार, हर साल की तरह इस बार भी अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर रखा जाएगा।

इस साल अहोई अष्टमी का व्रत 13 अक्टूबर को रखा जाएगा। यह पर्व मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान में बड़े ही भक्ति एवं श्रद्धा से मनाया जाता है।

आपको जानकारी के लिए बता दें, यह व्रत हर साल करवा चौथ के 4 दिन बाद मनाया जाता है। इस दिन पर माताएं अपनी संतान के स्वास्थ्य व उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए व्रत करती हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से संतान की आयु लंबी होती है, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और रोग-कष्ट दूर होते हैं। ज्योतिषयों के अनुसार, अहोई अष्टमी व्रत के दिन व्रती को कुछ कार्यो को करने परहेज करने से बचना चाहिए।

अहोई अष्टमी के दिन व्रती भूलकर भी न करें ये काम:

  • न ग्रहण करें अन्न या जल

ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, अहोई अष्टमी के दिन माताएं निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन भूलकर भी किसी भी प्रकार का भोजन या जल ग्रहण नहीं करना चाहिए, वरना व्रत टूट जाता है।

  • न करें नुकीली या धारदार का इस्तेमाल

ऐसा माना जाता है कि व्रत वाले दिन माताओं को किसी भी प्रकार की नुकीली या धारदार वस्तुओं का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

  • न करें मिट्टी से जुड़ा काम

अहोई अष्टमी के दिन मिट्टी से संबंधित कार्य करना वर्जित माना गया है।

  • सोना वर्जित

कहा जाता है कि इस दिन महिलाओं को सोना नहीं चाहिए। व्रत के दौरान उन्हें जागकर भगवान का ध्यान करना चाहिए और मंत्रों का जाप करना चाहिए।

  • बीच में न तोड़ें व्रत

व्रत का संकल्प लेने के बाद बीच में उसे तोड़ना नहीं चाहिए।

मान्यता है कि व्रत के समय महिलाओं को न तो किसी से झगड़ा करना चाहिए, न ही अपशब्दों का प्रयोग करना चाहिए।

  • झूठ बोलना वर्जित

इस दिन झूठ बोलना वर्जित है, क्योंकि व्रत के दौरान झूठ बोलना अशुभ माना जाता है। व्रत शुरू होने के बाद जब तक व्रत समाप्त न हो जाए, तब तक बिस्तर पर लेटना या बैठना उचित नहीं माना जाता है।

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