चतुर्मास (फोटो.सोशल मीडिया)
Chaturmas 2026 Rules: आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी के साथ ही भगवान विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में चले जाते है और इस चार माह के समय को चतुर्मास कहते हैं। यह चतुर्मास 21 नवंबर 2026 को देवउठनी एकादशी पर समाप्त होंगे।
चतुर्मास के चार माह भगवान विष्णु की आराधना के लिए बेहद ही शुभ व फलदायी माने गए हैं, लेकिन इस दौरान कई शुभ व मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। आइए जानते हैं, चतुर्मास के 4 महीनों में कौन सा काम करने से मंगल फल मिलते है और किन कामों को करने से बचना चाहिए।
चतुर्मास में मांगलिक कार्यों की मनाही क्यों?
धार्मिक कथाओं के मुताबिक, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव को सौंपकर चार महीनों के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी को जब श्री हरि जागते हैं, तभी से पुनः मांगलिक कार्य प्रारंभ होते हैं। विवाह, मुंडन, सगाई या गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्यों से पहले विष्णु जी का आशीर्वाद अनिवार्य माना गया है, इसलिए उनके निद्रा काल में सभी शुभ आयोजनों को स्थगित कर दिया जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
विज्ञान के दृष्टिकोण से इस कालखंड को समझने का प्रयास करें, तो चतुर्मास का समय मुख्य रूप से मानसून का होता है। इस मौसम में हवा में नमी बढ़ने से कीटाणु और संक्रमण तेजी से फैलते हैं। मनुष्य की पाचन शक्ति धामी हो जाती है। भारी बारिश के कारण यात्रा करना भी जोखिम से भरा होता है। इसी वजह से इस समय संयमित जीवन शैली, हल्का भोजन और यथासंभव यात्रा से परहेज का नियम बनाया गया है।
भगवान विष्णु (फोटो.सोशल मीडिया)
चतुर्मास के दौरान किन बातों का रखें ख्याल
- चतुर्मास के चार महीने में हर महीने एक विशेष खाद्य पदार्थ का त्याग किया जाता है। जैसे श्रावण मास में हरी पत्तेदार सब्जियां, भाद्र मास में में दही और छाछ, आश्विन में दूध और कार्तिक में काली उड़द और उससे बनने वाले सभी खाद्य पदार्थों का त्याग किया जाना चाहिए।
- इस अवधि में पेड़-पौधे काटने और जमीन खोदने जैसे कार्यों से भी बचना चाहिए। बारिश की वजह से कई जीव-जंतु मिट्टी में शरण लेते हैं। ऐसे में उनके जीवन चक्र को देखते हुए भी इन कार्यों को करने की मनाही बरती जाती है।
- इस विशेष समय में 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप विशेष पुण्यदायी होता है। मान्यता है कि श्रद्धा और नियम से चतुर्मास के नियमों का पालन करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मकता का वास होता है।
इसके अलावा भी चतुर्मास में इन यमों का पालन किया जाना चाहिए
- चतुर्मास में व्यक्ति को पलंग और बिस्तर का त्याग कर जमीन पर सोना चाहिए, लेकिन हुजुर्ग, गर्भवती महिला और बीमार व्यक्ति को ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है।
- इन चार महीनों में नियमित रूप से दीप दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
- चतुर्मास के दौरान तामसिक भोजन से दूरी बनाए रखनी चाहिए। अधिक तेल-मसाले युक्त आहार से बचना चाहिए और नशीले पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए।
- चतुर्मास में नमक और तेल का त्याग करने के लिए कहा जाता है। ऐसे करने से वाणी में मिठास आती है और संयम बढ़ता है।
- चतुर्मास में पलाश के पत्ते पर भोजन करना और गरीबों को अन्न-वस्त्र का दान करना शुभ माना जाता है।
- इस अवधि के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
- इस दौरान माता लक्ष्मी और तुलसी की पूजा से विशेष फल प्राप्त होता है। विष्णु सहस्रनाम का पाठ, श्री हरि के मंत्रों का जाप करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं।