रक्षाबंधन (फोटो.सोशल मीडिया)  
धर्म

Raksha Bandhan 2026: क्या पत्नी अपने पति को बांध सकती है राखी? जानें हिंदू धर्म की मान्यता

Raksha Bandhan 2026: राखी भाई-बहन के पवित्र रिश्तों का पर्व है, लेकिन पत्नी द्वारा पति को राखी बांधने का प्रश्न परंपरा, शास्त्र और समाज की दृष्टि से सही है या गलत। आइए जानते हैं शास्त्र क्या कहता है।

रीता राय सागर

Raksha Bandhan Religious Beliefs: रक्षाबंधन का त्योहार प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है, जो इस साल 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। यह भाई-बहन के स्नेह का पर्व है। इस दिन बहन-भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और माथे पर तिलक लगाती हैं।

लेकिन कई बार किसी खास परिस्थिति में या फिर रक्षा के वादे के तौर पर पत्नियां पति को राखी बांधती हैं। अब प्रश्न ये है कि क्या कोई पत्नी अपने पति को रक्षाबंधन पर राखी बांध सकती है? पत्नी द्वारा पति को राखी बांधने का प्रश्न परंपरा, शास्त्र और समाज की दृष्टि से क्या महत्व रखता है, क्या यह शास्त्र सम्मत है?

रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व

रक्षाबंधन की परंपरा में राखी बांधने का एक गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। राखी एक पवित्र धागा है, जिसे बहन अपने भाई की कलाई पर बांधती है। यह राखी न केवल सुरक्षा का प्रतीक होता है, बल्कि इसमें बहन की दीर्घायु, समृद्धि और खुशी की कामना भी की जाती है। यह रिश्ता भाई-बहन के बीच स्नेह, विश्वास और एक-दूसरे को बचाने के वचन से जुड़ा होता है।

क्या पत्नी अपने पति को राखी बांध सकती है?

शास्त्रों में पत्नी द्वारा पति को राखी बांधने की सख्त मनाही है। पति-पत्नी का वैवाहिक रिश्ता दांपत्य प्रेम व समर्पण से जुड़ा होता है। इसके विपरीत राखी का बंधन भाई-बहन के निःस्वार्थ, पवित्र और वात्सल्य पूर्ण रिश्ते का प्रतीक माना जाता है।

यदि पत्नी पति को राखी बांधती है, तो इसे रिश्तों की मर्यादा और सामाजिक परंपरा का उल्लंघन माना जाता है। ज्योतिषीय एवं शास्त्रीय दृष्टि से पति को राखी बांधना उनके बीच के दांपत्य भाव को नष्ट कर सकता है। जिससे वैवाहिक जीवन में बाधाएं भी आ सकती हैं।

हिंदू धर्म में पुराणों में कहीं भी पत्नी द्वारा पति को राखी बांधने का उल्लेख नहीं मिलता है। भविष्य पुराण में रक्षाबंधन का वर्णन मिलता है, जिसमें इन्द्र की पत्नी शचि ने उन्हें युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए रक्षासूत्र बांधा था, लेकिन यह संदर्भ पति-पत्नी के रिश्ते से अधिक देव-दानव युद्ध से जुड़ा था।

महाभारत में द्रौपदी द्वारा श्रीकृष्ण को राखी बांधने की कथा भी प्रचलित है, लेकिन यहां राखी का उद्देश्य सुरक्षा और समृद्धि से संबंधित था, न कि वैवाहित जीवन से।

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