Bhaum Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से माना जाता है, इसलिए इस दिन भगवान शिव के साथ मंगल देव और हनुमान जी की उपासना का विशेष महत्व है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भौम प्रदोष का व्रत और पूजा कर्ज से मुक्ति, वाद-विवाद तथा जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना के लिए की जाती है।
भौम प्रदोष में भगवान शिव की पूजा के साथ मंगल ग्रह की भी पूजा की जाती है। ज्योतिष में मंगल ग्रह को साहस, ऊर्जा, भूमि, पराक्रम और कर्ज मुक्ति से जुड़ा माना जाता है। यही वजह है कि इस दिन शिव आराधना के साथ मंगल से जुड़े दोषों और परेशानियों के निवारण के लिए भी पूजा की जाती है।
भौम प्रदोष की पूजा में शिवलिंग पर जल अर्पित करना माना जाता है। इस दिन तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें शहद मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करके ध्यान करना चाहिए। पूजा के दौरान बेलपत्र, फूल, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं।
अगर जीवन में कर्ज या आर्थिक परेशानियां चल रही हों, तो भौम प्रदोष पर ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। ऋणमोचक' का अर्थ ही ऋण से मुक्ति दिलाने वाला है।
मङ्गलो भूमिपुत्रश्च ऋणहर्ता धनप्रदः।
स्थिरासनो महाकायः सर्वकर्मविरोधकः।।
लोहितो लोहिताक्षश्च सामगानां कृपाकरः।
धरात्मजः कुजो भौमो भूतिदो भूमिनन्दनः।।
अङ्गारको यमश्चैव सर्वरोगापहारकः।
व्रुष्टेः कर्ताऽपहर्ता च सर्वकामफलप्रदः।।
एतानि कुजनामनि नित्यं यः श्रद्धया पठेत्।
ऋणं न जायते तस्य धनं शीघ्रमवाप्नुयात्।।
धरणीगर्भसम्भूतं विद्युत्कान्तिसमप्रभम्।
कुमारं शक्तिहस्तं च मङ्गलं प्रणमाम्यहम्।।
स्तोत्रमङ्गारकस्यैतत्पठनीयं सदा नृभिः।
अङ्गारक महाभाग भगवन्भक्तवत्सल।
त्वां नमामि ममाशेषमृणमाशु विनाशय।।
सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
प्रदोष काल में शिवलिंग का जल से अभिषेक करें।
तांबे के लोटे से जल और शहद अर्पित करें।
बेलपत्र और फूल चढ़ाएं।
भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
हनुमान चालीसा या ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें।
अंत में शिव जी और हनुमान जी की आरती करके अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें।