आशा दशमी व्रत ( सौ.AI) 
धर्म

Asha Dashami : आज है आशा दशमी व्रत, इस शुभ मुहूर्त में करें पूजा, होगी सभी मनोरथ पूरे

Asha Dashami Vrat:आज आशा दशमी व्रत रखा जा रहा है। इस दिन शुभ मुहूर्त में माता पार्वती और 10 आशा देवियों की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होने और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होने की धार्मिक मान्यता है।

सीमा कुमारी

Asha Dashami Vrat Puja Vidhi : आज 24 जुलाई 2026 को आशा दशमी व्रत रखा जा रहा हैं। हिंदू धर्म में आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की दशमी तिथि को मनाई जाने वाली आशा दशमी व्रत को बहुत ही शुभ और कल्याणकारी बताई गई है क्योंकि यह व्रत 10 आशा देवियों की पूजा से जुड़ा पावन व्रत होता हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आशा दशमी के दिन देवी पार्वती और आशा देवियों की मुख्य रूप से पूजा की जाती है। देवी ऐन्द्री, देवी आग्नेयी, देवी याम्या, देवी नैर्ऋति, देवी वारुणी, देवी वायव्या, देवी सौम्या, देवी ईशानी, देवी अधः और देवी ब्राह्मी ही 10 आशा देवियां हैं, जिनकी सच्चे मन से पूजा करने से हर मनोकामना पूरी होती है।

आशा दशमी व्रत का शुभ समय

  • पंचांग की गणना के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि का समय इस प्रकार है:
  • दशमी तिथि प्रारंभ: 23 जुलाई 2026 को सुबह 07:03 बजे से
  • दशमी तिथि समाप्त: 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे तक
  • आशा दशमी मुख्य व्रत तारीख (उदयातिथि अनुसार): 24 जुलाई 2026 (शुक्रवार)
  • प्रातः पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: सुबह 05:40 बजे से सुबह 09:10 बजे तक
  • अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:55 बजे तक
  • राहुकाल (पूजा से बचें): सुबह 10:45 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक

कैसे करें आशा दशमी व्रत की पूजा?

  • प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव की प्रतिमा स्थापित करें।
  • दीपक और धूप जलाएं।
  • फल, फूल, तुलसी और नैवेद्य अर्पित करें।
  • विष्णु सहस्रनाम या अपने इष्ट मंत्र का जाप करें।
  • व्रत कथा का पाठ करें।
  • आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

आशा दशमी व्रत का क्या है धार्मिक महत्व ?

हिंद धर्म में दशमी तिथि का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। फिर चाहे वह विजया दशमी हो या फिर गंगा दशहरा हो। मान्यता है कि आषाढ़ मास के शुक्लपक्ष की नवमी के दिन विधि-विधान से आशा दशमी व्रत को करने वाले साधक की कीर्ति और यश दसों दिशाओं में बढ़ती है और माता की कृपा से पूरे साल धन-धान्य की कमी नहीं होती है।

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