आमलकी एकादशी (सौ.सोशल मीडिया)  
धर्म

आमलकी एकादशी के दिन अगर किए इनमें से कोई भी काम, बनेंगे पाप के भोगी!

Amalaki Ekadashi Niyam:आमलकी एकादशी के दिन व्रत और पूजा का विशेष महत्व होता है। इस पावन तिथि पर कुछ ऐसे कार्य बताए गए हैं जिन्हें करने से व्रत का पुण्य फल कम हो सकता है।

सीमा कुमारी

Amalaki Ekadashi Kya Na Kare: हर साल फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाने वाली 'आमलकी एकादशी' का व्रत इस साल 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जा रहा है। आमलकी एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और आंवले के वृक्ष का पूजन विशेष फलदायी बताया गया है।

मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ व्रत करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। लेकिन इस पावन तिथि पर कुछ कार्यों से बचना चाहिए, वरना व्रत का पूर्ण फल नहीं मिल पाता।

आमलकी एकादशी पर क्या नहीं करना चाहिए?

  • तामसिक भोजन का सेवन

शास्त्रों के अनुसार, आमलकी एकादशी के दिन तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योंकि एकादशी एक बहुत ही पवित्र तिथि है इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

  • तुलसी की पत्तियां न तोड़ें

कहा जाता है कि, इस दिन तामसिक भोजन के अलावा तुलसी की पत्तियां भी नहीं तोड़ना चाहिए। क्योंकि, तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने की मनाही होती है।

  • चावल खाने की मनाही

शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित माना गया है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चावल खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म लेता है। इसलिए, चाहे आप व्रत रख रहे हों या नहीं, एकादशी के दिन चावल से परहेज करें।

  • आंवले के वृक्ष का अनादर

एकादशी के दिन चावल खाने के अलावा आंवले के पेड़ को काटना, उसकी शाखाएं तोड़ना या उसे नुकसान पहुंचाना भी अशुभ माना जाता है। श्रद्धा से पूजन करें और जल अर्पित करें।

  • क्रोध और वाद-विवाद

झगड़ा, अपशब्द या किसी का अपमान करना व्रत के पुण्य को कम कर सकता है। इस दिन मन, वाणी और व्यवहार को संयमित रखना चाहिए।

  • देर तक सोना

एकादशी के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान और पूजा का विशेष महत्व है। आलस्य से बचें और दिन को भक्ति में लगाएं।

आमलकी एकादशी व्रत का महत्व

सनातन धर्म में आमलकी एकादशी व्रत का बड़ा महत्व है। आमलकी एकादशी का व्रत पापों का नाश कर मोक्ष और विष्णु कृपा दिलाता है। आंवले के पेड़ की पूजा व परिक्रमा से विशेष पुण्य मिलता है। मान्यता है कि इस दिन विष्णु जी आंवले के वृक्ष में वास करते हैं, इसलिए इसके नीचे पूजा और दीपदान से जीवन में सुख-समृद्धि व पॉजिटिविटी आती है। यह रंगभरी एकादशी के रूप में भी प्रसिद्ध है, जो होली के आगमन का संकेत देती है।

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