Shri Premanand Ji Maharaj (Source. Pinterest) 
धर्म

ये 6 बातें धीरे-धीरे आपको पूरा बदल कर रख देंगी, Shri Premanand Ji Maharaj का जीवन बदलने वाला संदेश

Shri Premanand Ji Maharaj: भक्ति का मार्ग केवल बाहरी वेश या दिखावे तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह एक गहरा आंतरिक परिवर्तन है, जहां आत्मा मन की इच्छाओं के बजाय ईश्वर की धुन पर नृत्य करना सीखती है।

सिमरन सिंह

Shri Premanand Ji Maharaj Ne Bataye 6 Jaruri Bate:भक्ति का मार्ग केवल बाहरी वेश या दिखावे तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह एक गहरा आंतरिक परिवर्तन है, जहां आत्मा मन की इच्छाओं के बजाय ईश्वर की धुन पर नृत्य करना सीखती है। Shri Premanand Ji Maharaj के अनुसार, प्रभु के चरणों तक पहुंचने के लिए भक्त को अपने भीतर झांकना और सच्चे भक्त के लक्षणों को जीवन में उतारना आवश्यक है।

मन पर विजय और मृत्यु का भय समाप्त होना

एक सच्चे भक्त की पहली और सबसे महत्वपूर्ण पहचान है मन पर विजय। मन को उन्होंने "great deceiver" और "maha thug" कहा है, जो इंसान के दिव्य गुणों को चुरा कर उसमें काम, क्रोध जैसे आसुरी भाव भर देता है। जो व्यक्ति मन के पीछे चलता है, वह स्वयं ठगा जाता है। इसलिए साधक को मन की नहीं, बल्कि गुरु के वचनों की आज्ञा का पालन करना चाहिए। जब मन और इंद्रियां वश में आ जाती हैं, तब दूसरा लक्षण प्रकट होता है मृत्यु पर विजय। प्रभु के निरंतर स्मरण में लीन भक्त के भीतर मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है, क्योंकि वह जानता है कि वह ईश्वर की शरण में है और समय का चक्र उसे डरा नहीं सकता।

गुरु और प्रभु की दृष्टि में जीवन

सच्चा भक्त हर क्षण यह भाव रखता है कि "मेरे गुरु और मेरे प्रभु मुझे देख रहे हैं"। वह वही करता है, जिससे गुरु और भगवान प्रसन्न हों। यह भाव उसे हर गलत कदम से रोकता है। साथ ही, भक्त को समभाव सीखना चाहिए। भारी दुख या कठिन से कठिन परिस्थिति को भी वह प्रभु की कृपा मानकर मुस्कान के साथ स्वीकार करता है। धीरे-धीरे उसका पारिवारिक मोह कम होकर समस्त प्राणियों के प्रति "भगवत भाव" में बदल जाता है।

संत आत्मा के गुण

महापुरुषों के अनुसार, संतों में विनम्रता और अनुशासन के कई गुण होते हैं:

  • मान-अपमान से परे रहना
  • निजी संपत्ति का अभाव
  • सादा जीवन और साधारण वस्त्र
  • जागरूक नींद और ब्रह्ममुहूर्त में साधना
  • केवल प्रभु पर निर्भर रहना
  • अपमान या कष्ट में भी क्रोध न करना

नाम जप: सर्वोच्च साधना

भक्ति का सार है नाम जप। गुरु की शिक्षा है कि "एक भी श्वास भगवान के स्मरण के बिना व्यर्थ न जाए"। जब हर सांस के साथ नाम जुड़ जाता है, तो वह शरीर के हर कण में बस जाता है और प्रभु के प्रति सच्ची मोहब्बत जाग्रत होती है।

आज के साधक के लिए सावधानी

आज के समय में सबसे बड़ा खतरा मोबाइल फोन है। सत्संग सुनने के बजाय गंदी चीजें देखने से चरित्र और संस्कार नष्ट होते हैं। साधक को संकल्प लेना चाहिए कि वह अश्लील सामग्री से दूर रहेगा।

सेवा या भजन का विचार आए तो तुरंत करें, और गलत विचार आए तो उसे कल पर टालते रहें। कम बोलना, कम खाना, कम सोना और नाम जप व सत्संग बढ़ाना यही इस जीवन में प्रभु प्राप्ति का मार्ग है।

B Nagendra Resignation: कौन हैं बी नागेंद्र, डीके शिवकुमार कैबिनेट से क्यों दिया इस्तीफा; जानें सबकुछ

वाल्मीकि निगम घोटाले में घिरे B. Nagendra ने दिया इस्तीफा, बोले- दलित होने के कारण बनाया जा रहा निशाना

अरुणाचल प्रदेश में डोली धरती, कुरुंग कुमे में महसूस किए गए भूकंप के झटके; दहशत में घरों से बाहर निकले लोग!

रक्षाबंधन पर PM मोदी का खास अंदाज, बच्चों के साथ की मस्ती; छोटी बच्ची से की ये खास फरमाइश- VIDEO

मेरे भाग्य में आंदोलनों से निपटना है, अमित शाह ने क्यों कही ये बात? कोरोना काल का भी सुनाया बड़ा अनुभव