भजनलाल शर्मा  Source- X/BJP4Rajasthan
राजस्थान

भरतपुर से पाली तक बदला समीकरण, भजनलाल शर्मा ने मेयर चुनाव में कैसे पलटा पासा? जानें अंदर की कहानी

Rajasthan Civic Polls: राजस्थान निकाय चुनाव में BJP को 4 नगर निगमों में स्पष्ट बहुमत मिला, लेकिन बाद में 10 में से 9 निगमों में उसके मेयर बने। निर्दलीयों के समर्थन से कई जगह समीकरण बदले।

अर्पित शुक्ला

Rajasthan Mayor Election: राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने शुरुआत में तस्वीर को बीजेपी के लिए एकतरफा नहीं दिखाया। 10 नगर निगमों में बीजेपी चार में स्पष्ट बहुमत हासिल कर सकी, कांग्रेस एक नगर निगम में बहुमत तक पहुंची, जबकि जोधपुर, अलवर, अजमेर और पाली में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिला। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में तो निर्दलीय पार्षदों ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों से ज्यादा सीटें जीतीं।

लेकिन मेयर और नगर निकाय प्रमुखों के चुनाव तक तस्वीर काफी बदल गई। जयपुर, जोधपुर और कोटा में बीजेपी ने मेयर पद हासिल किया और 10 नगर निगमों में उसके मेयरों की संख्या बढ़कर 9 हो गई। बीकानेर में कांग्रेस अपना मेयर बनाने में सफल रही।

सवाल यह है कि जब कई नगर निगमों में बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था, तब पार्टी ने बोर्ड और मेयर पदों पर अपनी स्थिति कैसे मजबूत की?

पार्षद चुनाव में मुकाबला इतना एकतरफा नहीं था

राजस्थान के 309 शहरी निकायों के 10,244 वार्डों में घोषित नतीजों में बीजेपी ने 4,179 वार्ड जीते। कांग्रेस को 3,613 और निर्दलीयों को 2,273 वार्ड मिले। यानी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी जरूर बनी, लेकिन निर्दलीयों की बड़ी संख्या ने कई निकायों में सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखी।

वोट शेयर भी बीजेपी और कांग्रेस के बीच बहुत बड़ा अंतर नहीं दिखाता। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक बीजेपी को 35.19 फीसदी और कांग्रेस को 34.25 फीसदी वोट मिले, जबकि निर्दलीयों का वोट शेयर 27.38 फीसदी रहा।

यही वजह थी कि कई नगर निगमों में मेयर चुनाव सीधे बीजेपी बनाम कांग्रेस का मुकाबला नहीं था। निर्दलीय पार्षदों का समर्थन और क्रॉस-वोटिंग अहम हो गई।

भरतपुर में सबसे बड़ा उदाहरण

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में बीजेपी के सामने शुरुआत में चुनौती थी। 65 सदस्यीय नगर निगम में बीजेपी के 20, कांग्रेस के 7 और निर्दलीयों के 36 पार्षद थे। यानी निर्दलीय पार्षदों के पास अकेले ही बहुमत के लिए जरूरी संख्या से ज्यादा सीटें थीं।

इसके बाद समीकरण बदले और बीजेपी की अनुराधा सिंह निर्विरोध मेयर चुनी गईं। यह घटनाक्रम उन निकायों के लिए भी महत्वपूर्ण था जहां बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी तो थी, लेकिन उसके पास अपने दम पर बहुमत नहीं था।

भजनलाल शर्मा के लिए क्या मायने?

स्थानीय निकाय चुनाव के शुरुआती नतीजों में बीजेपी को कुछ इलाकों में झटका भी लगा। मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र भरतपुर में निर्दलीय सबसे बड़ी ताकत बने, जबकि बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह क्षेत्र पाली में कांग्रेस बीजेपी से आगे रही। झालावाड़ में भी कांग्रेस ने बीजेपी से ज्यादा वार्ड जीते।

इसके बावजूद मेयर और बोर्ड गठन के स्तर पर बीजेपी ने अपनी स्थिति मजबूत की। यही वजह है कि इन चुनावों को भजनलाल शर्मा सरकार के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

10 में से 9 नगर निगमों में BJP का मेयर

जयपुर, जोधपुर और कोटा में जीत के बाद राजस्थान के 10 नगर निगमों में से अब 9 नगर निगमों में बीजेपी के मेयर हो गए हैं। इससे पहले बीजेपी अलवर, अजमेर, उदयपुर और पाली में मेयर पद जीत चुकी थी, जबकि भरतपुर और भीलवाड़ा में उसके उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे।

वहीं, बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के अनिल कल्ला मेयर चुने गए। उन्होंने बीजेपी के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 50-30 के अंतर से हराया था।

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