सरपंच का चुनाव। इमेज-एआई 
राजस्थान

अब 10वीं पास ही बनेंगे सरपंच, इस राज्य में शैक्षणिक योग्यता लागू करने की तैयारी

Rajasthan Panchayat Election: राजस्थान में सरपंच और पार्षद बनना है तो 10वीं होना जरूरी है। इससे कम पढ़ा-लिखा चुनाव नहीं लड़ पाएगा। सरकार पंचायती राज चुनाव में शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य करने वाली है।

रंजन कुमार

Rajasthan Panchayat Election: राजस्थान सरकार पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों के लिए शैक्षणिक योग्यता की शर्त फिर लागू करने की योजना बना रही है। स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने बताया है कि शैक्षणिक योग्यता को लागू करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अनुमोदन के लिए भेजा गया है।

इस प्रस्ताव में सरपंच का चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार का कम-से-कम 10वीं पास होना अनिवार्य करने की बात कही गई है। पार्षद पद का चुनाव लड़ने के लिए 10वीं और 12वीं में से एक योग्यता लागू करने का प्रस्ताव है।

कानून में संशोधन की होगी जरूरत

स्वायत्त शासन मंत्री ने बताया कि पंचायती राज और निकाय चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता लागू करने के वास्ते पंचायती राज कानून और नगरपालिका कानून में संशोधन करने पड़ेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स्तर से मंजूरी मिलने के बाद दो अलग-अलग विधेयक लाए जाएंगे। विधानसभा के बजट सत्र में दोनों विधेयकों को पारित कर कानून में संशोधन कराया जा सकता है।

वसुंधरा राजे सरकार ने किया था लागू

साल 2015 में तत्कालीन वसुंधरा राजे सरकार के समय पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों में शैक्षणिक योग्यता लागू की गई थी। इसके तहत वार्ड पंच के लिए किसी तरह की शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता नहीं थी। मगर, सरपंच का आठवीं पास होना जरूरी था। आदिवासी इलाके में सरपंच के लिए 5वीं पास होना अनिवार्य किया गया था। पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के लिए 10वीं पास की योग्यता लागू की गई थी।

कांग्रेस सरकार ने कर दिया था रद्द

पार्षद और निकाय प्रमुखों के लिए 10वीं पास की योग्यता चाहिए थी, लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया था। साल 2018 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद 2019 में इस प्रावधान को हटा दिया गया।

महाराष्ट्र और गुजरात में भी लागू

महाराष्ट्र में पंचायती राज संस्थाओं के सदस्यों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता निर्धारित है। गुजरात में सरपंच पद के लिए न्यूनतम योग्यता तय की गई है। दरअसल, यह योग्यता मुख्य रूप से ग्राम पंचायत और जिला परिषद स्तर के चुनावों के लिए है, न कि विधानसभा या लोकसभा सदस्यों के लिए। यह जरूरत राज्य सरकारों की ओर से बनाए गए स्थानीय स्वशासन कानूनों (जैसे पंचायती राज अधिनियम) के तहत आती है, इसलिए हर राज्य में नियम अलग हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने कुछ फैसलों में ऐसी योग्यताओं को सही ठहराया है, लेकिन केंद्र सरकार ने इसे खत्म करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं।

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