पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान (Image- Social Media) 
पंजाब

हाई कोर्ट का आदेश, कर्मचारियों की मांग फिर भी अधर में लटका DA! पंजाब सरकार आखिर क्यों कर रही देरी?

DA Arrears Punjab: पंजाब के लाखों कर्मचारी और पेंशनभोगी रुके हुए महंगाई भत्ते का इंतजार कर रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद DA जारी नहीं होने से सरकार पर सवाल उठ रहे हैं।

अर्पित शुक्ला

Punjab Dearness Allowance Update: पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता (DA) का मुद्दा लगातार गरमाता जा रहा है। लाखों कर्मचारी लंबे समय से रुके हुए डीए एरियर और बढ़ोतरी का इंतजार कर रहे हैं। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के बाद कर्मचारियों को उम्मीद जगी थी कि सरकार जल्द राहत देगी, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ है। कर्मचारियों का आरोप है कि जब राज्य में तैनात आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को बढ़ा हुआ डीए मिल रहा है, तो फिर नियमित कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को इससे क्यों वंचित रखा जा रहा है।

फरवरी 2026 में आए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के बाद उम्मीद जगी थी कि राज्य के 7.5 लाख से अधिक परिवारों को राहत मिलेगी। लेकिन अदालत के आदेश के कई महीने बाद भी कर्मचारियों को बकाया महंगाई भत्ता नहीं मिला है, जिससे उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है।

मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए जीवनरेखा है डीए

सरकारी कर्मचारियों का कहना है कि महंगाई भत्ता केवल वेतन का हिस्सा नहीं, बल्कि बढ़ती महंगाई से राहत देने वाला अहम सहारा है। इसी राशि से बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन, बुजुर्गों की दवाइयां और बैंक की ईएमआई जैसे जरूरी खर्च पूरे होते हैं। ऐसे में डीए में देरी का सीधा असर परिवार के मासिक बजट पर पड़ता है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा था?

फरवरी 2026 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने अहम फैसले में कहा था कि महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है, कोई सरकारी अनुग्रह नहीं। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार वित्तीय संकट या खाली खजाने का हवाला देकर इसे अनिश्चितकाल तक नहीं रोक सकती। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को लंबित डीए जारी करने और देरी के लिए ब्याज देने का भी निर्देश दिया था। बाद में अदालत ने इस फैसले पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया।

'खाली खजाने' के दावे पर कर्मचारियों के सवाल

पंजाब सरकार लगातार राज्य की आर्थिक स्थिति, बढ़ते कर्ज और पेंशन के बोझ का हवाला देकर डीए जारी करने में देरी का कारण बता रही है। हालांकि कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह तर्क वास्तविकता से मेल नहीं खाता।

कर्मचारी संगठनों ने आरटीआई से प्राप्त जानकारी के हवाले से दावा किया कि मार्च 2022 से मार्च 2025 के बीच राज्य सरकार ने केवल प्रिंट मीडिया में प्रचार और विज्ञापनों पर 317.17 करोड़ रुपये खर्च किए। कर्मचारी संगठनों का आरोप है कि सरकार के पास प्रचार अभियानों के लिए पर्याप्त धन है, लेकिन कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों के भुगतान के लिए नहीं।

पड़ोसी राज्यों से पीछे पंजाब

महंगाई भत्ते के मामले में पंजाब अपने पड़ोसी राज्यों से पीछे दिखाई दे रहा है। हरियाणा और राजस्थान सहित कई राज्यों ने केंद्र सरकार की तर्ज पर कर्मचारियों का डीए बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया है, जबकि पंजाब के नियमित कर्मचारियों को अभी भी 42 प्रतिशत डीए ही मिल रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस अंतर का असर कर्मचारियों की क्रय शक्ति पर पड़ रहा है और बढ़ती महंगाई के बीच आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है।

अब कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब केंद्र सरकार और कई राज्य अपने कर्मचारियों को बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता दे चुके हैं और हाईकोर्ट भी इसे कर्मचारियों का कानूनी अधिकार बता चुका है, तो पंजाब सरकार लंबित डीए जारी करने में आखिर देरी क्यों कर रही है। यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद बना रह सकता है।

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