पंजाब के गांवों में चली 'AAP' की आंधी (फोटो- सोशल मीडिया) 
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'काम बोलता है' पंजाब में चली 'AAP' की आंधी, 70% सीटों पर ऐतिहासिक जीत; गदगद हुए केजरीवाल

Punjab की राजनीति में एक बार फिर AAP ने अपना परचम लहरा दिया है। ब्लॉक समिति और जिला परिषद चुनावों के नतीजों ने साबित कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में भगवंत मान सरकार की लहर नहीं, बल्कि आंधी चली है।

सौरभ शर्मा

Punjab Election Results AAP Victory: पंजाब की राजनीति में एक बार फिर आम आदमी पार्टी ने अपना परचम लहरा दिया है। हाल ही में हुए ब्लॉक समिति और जिला परिषद चुनावों के नतीजों ने साबित कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में भगवंत मान सरकार की लहर नहीं, बल्कि आंधी चल रही है। करीब 70 प्रतिशत सीटों पर 'आप' की शानदार जीत ने विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया है। यह जीत महज एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सरकार के काम पर जनता की खुली मुहर है, जिसने साबित कर दिया है कि लोग अब नारे नहीं, काम देखते हैं।

अरविंद केजरीवाल और मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन नतीजों को ऐतिहासिक करार दिया है। आमतौर पर चार साल की सरकार के बाद एंटी-इंकम्बेंसी की चर्चा होती है, लेकिन पंजाब में तस्वीर बिल्कुल उलट है। यहां 'प्रो-इंकम्बेंसी' साफ नजर आई। चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष रहे, जिसका सबूत 580 सीटों पर 100 से कम वोटों का अंतर है। कई जगहों पर कांग्रेस महज 3-4 वोटों से जीती, जो बताता है कि अगर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग होता, तो विपक्ष का खाता भी शायद ही खुल पाता।

बिजली, पानी और नौकरी का जादू

इस भारी जनादेश के पीछे सरकार के वे ठोस फैसले हैं, जिनका असर सीधा जमीन पर दिखा है। 70 साल बाद पहली बार खेतों तक नहरी पानी पहुंचा और 90 फीसदी घरों को मुफ्त बिजली मिल रही है। किसानों को अब रात में जागकर ट्यूबवेल नहीं चलाने पड़ते, उन्हें दिन में बिजली मिल रही है। वहीं, 58 हजार से ज्यादा युवाओं को बिना रिश्वत और सिफारिश के सरकारी नौकरी मिली है। मोहल्ला क्लीनिक, बेहतर स्कूल और नशा तस्करों पर सख्त कार्रवाई ने आम आदमी का भरोसा जीता है। पर्यावरण और स्वास्थ्य के मुद्दों पर सरकार की गंभीरता ने भी वोटर्स को अपनी ओर खींचा है।

जश्न के बीच हिंसक झड़प

एक तरफ जहां जीत का जश्न था, वहीं लुधियाना के गिल क्षेत्र में माहौल थोड़ा तनावपूर्ण हो गया। जीत के जुलूस के दौरान आम आदमी पार्टी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में बहस के बाद मारपीट और फायरिंग की घटना सामने आई, जिसमें तीन लोग घायल हो गए। हालांकि, पुलिस ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाल लिया। इन छिटपुट घटनाओं के बावजूद, चुनाव के नतीजे 2027 के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकेत हैं। ग्रामीण जनता ने अकाली दल और कांग्रेस को नकारते हुए स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वे विकास और पारदर्शिता के साथ खड़े हैं।

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