तापसी पन्नू (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
पिंक: साल 2016 में आई फिल्म पिंक भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई। उस दौर में अक्सर कोर्ट ड्रामों में पुरुष कलाकारों का दबदबा रहता था, लेकिन इस फिल्म ने 3 साधारण युवतियों के संघर्ष को मुख्यधारा में लाकर खड़ा किया। शबाना: साल 2017 में आई नाम शबाना के जरिए उन्होंने उस समय एक्शन थ्रिलर शैली में कदम रखा, जब महिला-केंद्रित एक्शन फिल्में मुख्यधारा का हिस्सा नहीं मानी जाती थीं। इस रोल में शारीरिक क्षमता, समझदारी और भावनात्मक गहराई का बेजोड़ संगम देखने को मिला। बदला: साल 2019 में आई तापसी की फिल्म बदला। जिससे उन्होंने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। यह पूरी फिल्म केवल कथानक और बेहतरीन एक्टिंग के ताने-बाने पर टिकी थी, जिसमें उनके काम ने दर्शकों को अंत तक बाँधकर रखा। थप्पड़: वहीं साल 2020 में रिलीज़ हुई फिल्म थप्पड़ ने तो पूरे देश की चेतना को हिलाकर रख दिया। शुरुआत में कई लोगों का मानना था कि केवल एक थप्पड़ के मुद्दे पर बनी फिल्म दर्शकों को सिनेमाघरों तक नहीं खींच पाएगी। आत्मसम्मान, बराबरी और रिश्तों में मर्यादा जैसे विषयों पर हर घर में फिल्म थप्पड़ की चर्चा की शुरुआत कर दी।रश्मि रॉकेट: तापसी का सफर केवल यहीं तक सीमित नहीं रहा। साल 2021 की फिल्म रश्मि रॉकेट में तापसी ने एथलीटों के जेंडर टेस्ट जैसे अनछुए और संवेदनशील मुद्दे को पर्दे पर उतारा। इसके लिए उन्होंने न केवल कठिन शारीरिक प्रशिक्षण लिया, बल्कि खिलाड़ी के मानसिक तनाव को भी बखूबी दर्शाया।सांड की आंख: इससे पहले 2019 की फिल्म सांड की आंख में उन्होंने प्रकाशी तोमर की भूमिका निभाकर साबित किया था कि उम्र की लिमिट किसी के सपनों को नहीं रोक सकतीं। सिनेमा के बदलते दौर में तापसी ने हमेशा साबित किया है कि अलग पहचान नया रास्ता बनाने से ही मिलती है।हसीन दिलरुबा: साल 2021 में आई हसीन दिलरुबा में उन्होंने रानी का एक ऐसा रोल निभाया, जो पारंपरिक आदर्श नायिकाओं से बिल्कुल अलग, अप्रत्याशित और इंसानी कमियों से भरा हुआ था।