संजय लीला भंसाली (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
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दिलकशी से मौत तक... संजय लीला भंसाली की फिल्मों में दिखते हैं मोहब्बत के 7 रंग

Sanjay Leela Bhansali Love Stories: फेमस फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली के सिनेमा में प्यार महज एक अहसास नहीं बल्कि गहरा सफर है। उनकी फिल्मों के जरिए मोहब्बत के 7 अलग-अलग पड़ावों को दर्शाया गया है।

यति सिंह
प्यार का पहला पड़ाव दिलकशी यानी आकर्षण होता है। फिल्म सांवरिया में दो अजनबियों की मुलाकात और उनके बीच पनपती उम्मीदों को भंसाली ने इसी रूप में दर्शाया है।
इसके बाद दूसरा पड़ाव है अन्स यानी लगाव का आता है, जहां किसी खास शख्स की मौजूदगी आदत बनने लगती है। हम दिल दे चुके सनम में समीर और नंदिनी की शरारतों से शुरू हुआ रिश्ता धीरे-धीरे इसी भावनात्मक जुड़ाव में बदल जाता है।
तीसरे पड़ाव में यही आकर्षण मोहब्बत का रूप ले लेता है, जो इंसान की पहचान का हिस्सा बन जाता है। गोलियों की रासलीला राम-लीला में चारों तरफ फैली दुश्मनी के बीच राम और लीला का बेबाक प्रेम इसी बात का उदाहरण है।
चौथे पड़ाव को अकीदत यानी विश्वास और श्रद्धा कहा जाता है। बाजीराव मस्तानी में बाजीराव और मस्तानी का रिश्ता सामाजिक बंदिशों और विरोध के बाद भी एक-दूसरे पर अटूट भरोसा रखना सिखाता है।
5वें पड़ाव इबादत में प्रेमी की खुशी ही सबसे ऊपर हो जाती है, जैसा कि देवदास में पारो और देवदास के दूर रहकर भी जुड़े रहने वाले सच्चे रिश्ते में दिखा।
छठा पड़ाव जुनून यानी पागलपन का होता है, जहां प्यार सोच और समझ पर हावी हो जाता है। हीरामंडी सीरीज में लज्जो का वली मोहम्मद के प्रति एकतरफा और अटूट झुकाव इसी दीवानगी को दिखाता है।
प्यार का आखिरी और सबसे गहरा पड़ाव मौत यानी समर्पण है। यह जरूरी नहीं कि केवल शारीरिक अंत हो, बल्कि यह इंसान के अपने अहंकार को मिटा देने की प्रक्रिया है। राम-लीला के अंत में दोनों प्रेमियों का एक साथ अपनी जान देना इसी सबसे बड़े त्याग को दर्शाता है।

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