रामायण के पात्र डिजाइन फोटो
महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण को "आदि काव्य" कहा जाता है। इसमें सात कांड और लगभग चौबीस हजार श्लोक माने जाते हैं। हर किरदार अपने आप में एक कथा है, और हर कथा से कोई सीख मिलती है। चलिए जानते हैं श्रीराम, सीता, हनुमान और रावण समेत 10 प्रमुख पात्रों की दिलचस्प बातें।अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र राम इक्ष्वाकु वंश के राजकुमार थे। उन्हें भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। पिता के वचन की मर्यादा रखते हुए उन्होंने चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार किया। इसी त्याग और आदर्श आचरण के कारण उन्हें "मर्यादा पुरुषोत्तम" कहा जाता है। चैत्र शुक्ल नवमी को उनका जन्म दिवस रामनवमी के रूप में मनाया जाता है।मिथिला के राजा जनक को हल चलाते समय धरती से सीता मिलीं, इसी कारण उनका नाम "सीता" पड़ा, जिसका अर्थ हल की रेखा भी है। उन्हें जानकी और मैथिली भी कहा जाता है। स्वयंवर में शिव का धनुष तोड़कर राम ने उनसे विवाह किया। वन में रावण द्वारा हरण के बाद भी उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया। लव और कुश उनके ही पुत्र थे।रानी सुमित्रा के पुत्र लक्ष्मण, शत्रुघ्न के जुड़वाँ भाई थे। जब राम वनवास के लिए निकले, तो लक्ष्मण भी बिना किसी माँग के उनके साथ हो लिए। लोककथाओं में यह भी कहा जाता है कि वे चौदह वर्ष जागते रहे ताकि राम और सीता की रक्षा कर सकें। प्रसिद्ध "लक्ष्मण रेखा" का वर्णन वाल्मीकि रामायण में नहीं, बल्कि बाद की रचनाओं और लोकप्रिय रूपांतरों में मिलता है।रानी कैकेयी के पुत्र भरत जब ननिहाल से लौटे और राम के वनवास की ख़बर मिली, तो वे दुखी हो उठे। उन्होंने राजगद्दी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। वे वन जाकर राम को मनाने पहुँचे। राम के न लौटने पर भरत उनकी चरण-पादुकाएँ लेकर आए और उन्हें सिंहासन पर रखकर अयोध्या के पास नंदीग्राम में तपस्वी जैसा जीवन जीते हुए शासन चलाया। यह त्याग भ्रातृ-प्रेम का आदर्श माना जाता है।हनुमान को अंजना और केसरी का पुत्र तथा पवनदेव का अंश माना जाता है। रामायण में वे सुग्रीव के मंत्री और राम के परम भक्त बनकर आते हैं। उन्होंने समुद्र लाँघकर लंका पहुँचकर माता सीता का पता लगाया और रावण की लंका को अपनी पूँछ की आग से जलाया। लक्ष्मण के घायल होने पर वे संजीवनी बूटी वाला पर्वत उठा लाए। कई परंपराओं में उन्हें चिरंजीवी माना जाता है।लंका का राजा रावण पुलस्त्य ऋषि का पौत्र और विश्रवा तथा कैकसी का पुत्र था। परंपरा में उसे चारों वेदों और शास्त्रों का ज्ञाता, शिव का परम भक्त और वीणा-वादक बताया गया है। शिव तांडव स्तोत्र की रचना भी उसी से जोड़ी जाती है। पर अहंकार और सीता के हरण ने उसके पतन की नींव रखी। यही कारण है कि रामायण में वह प्रतिनायक होते हुए भी याद किया जाता है।रावण के छोटे भाई कुंभकर्ण को अपने विशाल शरीर और बल के लिए जाना जाता है। उत्तरकांड की कथा के अनुसार उसने ब्रह्मा से वरदान माँगते समय सरस्वती देवी के प्रभाव से "निर्देवत्व" की जगह "निद्रावत्व" माँग लिया और उसे बहुत लंबी नींद मिल गई। लोक-परंपरा में उसकी छह महीने की नींद प्रसिद्ध है। युद्ध में उसने भाई के पक्ष में लड़ते हुए वीरगति पाई।रावण के छोटे भाई विभीषण ने बार-बार भाई को सीता लौटाने की सलाह दी। जब रावण ने उनकी बात नहीं मानी, तो वे लंका छोड़कर राम की शरण में पहुँचे। राम ने उन्हें अपनाया और युद्ध के बाद लंका का राजा बनाया। रावण की नाभि में अमृत वाली कथा और विभीषण द्वारा उसका रहस्य बताने का प्रसंग मूल वाल्मीकि रामायण में नहीं, बल्कि बाद की रामकथाओं में मिलता है।किष्किंधा के वानर राजा सुग्रीव को अपने भाई बाली के कारण राज्य छोड़ना पड़ा था। राम से अग्नि को साक्षी मानकर उनकी मित्रता हुई। राम ने बाली का वध किया और सुग्रीव फिर राजा बने। बदले में सुग्रीव ने सीता की खोज के लिए चारों दिशाओं में वानर-दल भेजे और राम की सेना का साथ दिया। यही मित्रता लंका-विजय की नींव बनी।गिद्धराज जटायु राजा दशरथ के मित्र थे। जब रावण सीता का हरण करके आकाश-मार्ग से जा रहा था, तो वृद्ध जटायु ने उसे रोकने की कोशिश की। रावण ने उनके पंख काट दिए। घायल जटायु ने राम को घटना बताई और प्राण त्याग दिए। राम ने उनका अंतिम संस्कार स्वयं किया। आज केरल के चडयमंगलम में उनकी विशाल मूर्ति इस बलिदान की याद दिलाती है।