कसावु साड़ी फोटो.सोशल मीडिया
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Kasavu Saree: केरल की शान है ये सफेद-सुनहरी साड़ी, जानें 7 तस्वीरों में इसकी खूबसूरत कहानी

Kasavu Saree केरल की पहचान मानी जाने वाली सफेद या क्रीम रंग की साड़ी है, जिसकी सुनहरी जरी वाली किनारी इसकी खासियत है। जानें इस पारंपरिक परिधान की खूबसूरती, बुनाई और संस्कृति की कहानी।

रीता राय सागर
सफेद या आइवरी रंग का कपड़ा और सुनहरी किनारी- यही है कसावु साड़ी की पहचान। सादगी और शाही अंदाज का यह मेल इसे केरल की सबसे खास पारंपरिक पोशाकों में शामिल करता है।
पारंपरिक सोने के आभूषणों के साथ कसावु साड़ी बेहद क्लासिक लगती है, जबकि मॉडर्न ब्लाउज के साथ इसे समकालीन अंदाज दिया जा सकता है। यही वजह है कि यह साड़ी आज भी अपनी पारंपरिक पहचान के साथ फैशन में बनी हुई है।
कसावु साड़ी का रिश्ता केरल की संस्कृति और पारंपरिक बुनाई से जुड़ा है। पीढ़ियों से यह पोशाक मां से बेटी तक पहुंचती रही है और खासतौर पर ओणम, विषु और धार्मिक उत्सवों में पहनी जाती है।
‘Kasavu’ शब्द साड़ी की सुनहरी जरी वाली किनारी से जुड़ा है। पुराने समय में इसमें असली सोने की जरी का इस्तेमाल किया जाता था, जबकि आज आधुनिक धातु से बनी जरी भी प्रचलित है।
कसावु साड़ी का हल्का सूती कपड़ा इसे लंबे उत्सवों और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए आरामदायक बनाता है। इसकी प्राकृतिक बनावट साड़ी के सादे लेकिन आकर्षक रूप को और निखारती है।
कसावु साड़ी बनाने में सूती धागों को तैयार करने से लेकर करघे पर बुनाई तक कई बारीक चरण शामिल होते हैं। बुनकर हर धागे को सावधानी से व्यवस्थित करते हुए सुनहरी किनारी को कपड़े में पिरोते हैं।
आज कसावु साड़ी सिर्फ पारंपरिक पहनावे तक सीमित नहीं है। डिजाइनर इसे आधुनिक ब्लाउज, अलग ड्रेपिंग स्टाइल, बेल्ट और फ्यूजन आभूषणों के साथ नया रूप दे रहे हैं।

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