पारंपरिक बंगाली साड़ी फोटो.सोशल मीडिया
गरद सिल्क साड़ी बंगाल की पारंपरिक साड़ियों में खास जगह रखती है। इसका क्रीम या सफेद रंग का बेस और लाल बॉर्डर इसे सादगी के साथ आकर्षक बनाता है। दुर्गा पूजा की सप्तमी या अष्टमी की सुबह अंजलि देने के लिए यह साड़ी पहनी जाती है। इसके साथ लाल बिंदी, सोने के गहने और बालों में गजरा लगाकर पारंपरिक बंगाली लुक पूरा करें।पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के धनेखाली क्षेत्र की सूती साड़ियां अपनी बुनाई और टिकाऊपन के लिए जानी जाती हैं। ये पहनने में हल्की और आरामदायक होती हैं। दिनभर पंडाल घूमने के लिए लाल, नीले, हरे या सफेद रंग की धनेखाली साड़ी चुन सकती हैं। इसके साथ छोटे झुमके और आरामदायक सैंडल पहनें।जामदानी साड़ी अपनी बारीक बुनाई और कपड़े पर उभरते खूबसूरत मोटिफ जैसे- फूल-पत्तियों और ज्यामितीय आकृतियों के लिए मशहूर है। सफेद और लाल, पेस्टल या हल्के रंगों की जामदानी साड़ी दुर्गा पूजा के दिन के कार्यक्रमों के लिए अच्छी रहेगी। इसे सिल्वर जूलरी, छोटी बिंदी और खुले बालों के साथ स्टाइल करें।टसर सिल्क साड़ी की नेचुरल चमक और टेक्सचर इसे बाकी सिल्क साड़ियों से अलग बनाते हैं। रस्ट, गोल्डन, बेज या मिट्टी जैसे रंगों की टसर साड़ी दोपहर में पंडाल घूमने या दोस्तों के साथ मिलने-जुलने के लिए चुन सकती हैं। इसके साथ कांथा कढ़ाई वाला ब्लाउज और हल्की जूलरी खूबसूरत लगेगी।पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के शांतिपुर क्षेत्र की साड़ियां अपनी महीन बुनाई और अपने हल्केपन के कारण गर्म मौसम में आरामदायक रहती हैं। दुर्गा पूजा के दौरान दिन में घूमने के लिए सफेद, लाल बॉर्डर या हल्के रंगों वाली साड़ी चुन सकती हैं। इसे लाल बिंदी, शंखा पोला और पारंपरिक झुमकों के साथ स्टाइल करें।पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बालूचर क्षेत्र से जुड़ी बालूचारी साड़ी के पल्लू पर रामायण, महाभारत और भारतीय कला से प्रेरित दृश्य बुने जा सकते हैं। दुर्गा पूजा की नवमी या दशमी पर खास लुक के लिए मरून, बैंगनी या गहरे रंग की बालूचारी साड़ी चुनें। इसके साथ सोने के गहने और नीट बन अच्छा लगेगा।