देव आनंद (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
साल 1951 में आई फिल्म 'बाजी' से हिंदी सिनेमा को गुरु दत्त जैसा महान निर्देशक मिला। देव आनंद के नवकेतन प्रोडक्शन के तहत बनी इस क्राइम थ्रिलर फिल्म में उन्होंने एक जुआरी का किरदार निभाया था।साल 1958 की फिल्म 'काला पानी' में देव आनंद ने एक ऐसे गुस्सैल बेटे का रोल निभाया जो अपने बेकसूर पिता को जेल से छुड़ाने के लिए संघर्ष करता है। इस फिल्म में उनके जबरदस्त एक्टिंग की खूब सराहना हुई थी।साल 1963 की रोमांटिक कॉमेडी 'तेरे घर के सामने' का फेमस गाना 'दिल का भंवर करे पुकार' इतिहास में पहली बार कुतुब मीनार के अंदरूनी हिस्सों में शूट किया गया था।आर के नारायण के उपन्यास पर बनी फिल्म 'गाइड' उनके करियर की सबसे प्रेरणादायक और ऐतिहासिक फिल्म मानी जाती है। वहीदा रहमान के साथ बनी यह फिल्म सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी में ऑस्कर पुरस्कारों तक पहुंची थी। इसके अलावा 'ज्वेल थीफ', 'जॉनी मेरा नाम' और बतौर डायरेक्टर उनकी पहली फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' ने उस दौर में हिप्पी संस्कृति और आधुनिक विषयों को पर्दे पर लाकर एक नया ट्रेंड शुरू किया था।