बॉलीवुड फिल्मों के चौंकाने वाले क्लाइमैक्स (सौ. डिजाइन फोटो)
साल 1981 में कमल हासन और रति अग्निहोत्री की फिल्म एक दूजे के लिए अपने भावुक प्रेम और दुखद क्लाइमैक्स के लिए याद की जाती है। फिल्म के अंत में परिस्थितियों और सामाजिक विरोध से परेशान होकर फिल्म के दोनों मेन लीड एक ऊंची जगह से छलांग लगाकर अपनी जान दे देते हैं। फिल्म के इस दुखद अंत को लेकर उस दौर में काफी चर्चा और विवाद हुआ था। कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि फिल्म के अंत से प्रभावित होकर कुछ प्रेमी जोड़ों ने आत्महत्या की कोशिश की। साल 1983 में कमल हासन और श्रीदेवी की फिल्म सदमा का अंत हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक क्लाइमैक्स में गिना जाता है। फिल्म के आखिरी हिस्से में कमल हासन का किरदार श्रीदेवी के किरदार को पहचानने और रोकने की कोशिश करता है, लेकिन परिस्थितियां इतनी तेजी से बदलती हैं कि अंत दर्शकों को गहरे भावनात्मक असर के साथ छोड़ देता है।साल 1993 में शाहरुख खान की बाजीगर ने भी अपने दौर के पारंपरिक फिल्मी फॉर्मूले को चुनौती दी। फिल्म में शाहरुख का किरदार बदले की आग में कानून अपने हाथ में लेता है। अंत में विलेन को खत्म करने के बाद वह अपनी मां की बाहों में दम तोड़ देता है। फिल्म के मेन लीड के किरदार का नेगेटिव शेड में होना और अंत में उसकी मौत होना उस दौर के लिए काफी अलग और चौंकाने वाला प्रयोग था।साल 2007 में अक्षय कुमार और विद्या बालन की भूल भुलैया का क्लाइमैक्स भी दर्शकों के लिए बड़ा ट्विस्ट लेकर आया। फिल्म में धीरे-धीरे सामने आता है कि कथित भूतिया घटनाओं के पीछे किसी बाहरी आत्मा के बजाय अवनी का मानसिक स्वास्थ्य संबंधी डिसोसिएटिव आइडेंटिटी डिसऑर्डर जिम्मेदार है और वह खुद को मंजुलिका समझने लगती है। फिल्म में विद्या बालन का आमी जे तोमार पर किया गया प्रदर्शन और क्लाइमैक्स का साइकोलॉजिकल ट्विस्ट आज भी फिल्म के सबसे यादगार हिस्सों में शामिल है।साल 2012 में आमिर खान, करीना कपूर और रानी मुखर्जी स्टारर तलाश के क्लाइमैक्स में भी कहानी पूरी तरह बदल जाती है। फिल्म में आमिर खान के किरदार की मदद करने वाली रहस्यमयी महिला रोज के बारे में अंत में पता चलता है कि वह सामान्य इंसान नहीं, बल्कि एक आत्मा है। यह खुलासा इसलिए भी चौंकाने वाला था, क्योंकि फिल्म का अधिकांश हिस्सा एक क्राइम मिस्ट्री और रियलिस्टिक इन्वेस्टिगेशन की तरह आगे बढ़ता है।
साल 2012 में विद्या बालन की कहानी ने भी क्लाइमैक्स में ऐसा ट्विस्ट दिया, जिसने पूरी कहानी को एक अलग नजरिए से देखने पर मजबूर कर दिया। फिल्म में अपने लापता पति को तलाश रही गर्भवती महिला के रूप में नजर आने वाली विद्या बागची के बारे में अंत में कई चौंकाने वाले सच सामने आते हैं। फिल्म का क्लाइमैक्स यह साफ करता है कि उसकी पूरी तलाश के पीछे बदले की एक सोची-समझी योजना थी और उसने अपनी पहचान को लेकर भी दर्शकों को भ्रमित किया था।
साल 2015 में अजय देवगन की दृश्यम का क्लाइमैक्स भी हिंदी सिनेमा के चर्चित ट्विस्ट में शामिल है। फिल्म में विजय सालगांवकर पुलिस की जांच को मात देने के लिए एक ऐसी योजना बनाता है, जिसमें पुलिस को यह यकीन दिलाया जाता है कि परिवार एक खास तारीख और जगह पर मौजूद था। क्लाइमैक्स में सामने आता है कि जिस पुलिस स्टेशन को पुलिस सबूतों के लिए खंगाल रही है, उसी की नींव के नीचे विजय ने लाश छिपाई थी। दर्शकों के सामने जब पूरी साजिश की तस्वीर साफ होती है, तो फिल्म का क्लाइमैक्स कहानी को एक अलग स्तर पर ले जाता है।