संबित पात्रा (फोटो- सोशल मीडिया) 
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संबित पात्रा ने मणिपुर हिंसा के सवाल पर दिखाए तेवर, कहा- क्षेत्रीय अखंडता पर कोई समझौता नहीं

मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद भाजपा सांसद संबित पात्रा ने शुक्रवार को दोहराया कि राज्य की क्षेत्रीय अखंडता बरकरार रहेगी। क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता की शपथ ली।

Saurabh Pal

इंफालः मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद भाजपा सांसद संबित पात्रा ने शुक्रवार को दोहराया कि राज्य की क्षेत्रीय अखंडता बरकरार रहेगी। क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए अपनी पार्टी की प्रतिबद्धता की शपथ ली। संबित पात्रा उत्तर पूर्व भाजपा इकाई के प्रभारी हैं। उन्होंने हिंसा प्रभावित राज्य में स्थिरता बनाए रखने के लिए पार्टी की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। इसके भाजपा सांसद ने कहा कि मणिपुर में अवैध घुसपैठ से सख्ती से निपटा जाएगा, क्योंकि राजनीतिक अस्थिरता और जातीय तनाव के बीच शुक्रवार को राज्य की राजधानी इंफाल में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।

पात्रा ने एएनआई को बताया कि मणिपुर के राज्यपाल की रिपोर्ट के बाद भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य विधानसभा को निलंबित कर दिया है, जिसका अर्थ है कि परिस्थितियों के आधार पर भारत के राष्ट्रपति जब चाहें इसे पुनर्जीवित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक ​​भाजपा का सवाल है, हम राज्य में शांति के निरंतर प्रयासों और मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

संबित पात्रा ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर भाजपा के रुख को दोहराते कहा कि मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। किसी भी तरह की अवैध घुसपैठ की अनुमति नहीं दी जाएगी और उससे सख्ती से निपटा जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट के बाद संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत गुरुवार को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया। इस फैसले से राज्य विधानसभा के अधिकार निलंबित हो गए हैं और इसकी शक्तियां संसद को हस्तांतरित हो गई हैं।

राज्य का प्रशासन अब राज्यपाल के माध्यम से सीधे राष्ट्रपति द्वारा नियंत्रित किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी भारत के राजपत्र में प्रकाशित घोषणा में कहा गया है कि मणिपुर विधानसभा की शक्तियां संसद को हस्तांतरित हो जाएंगी और इससे राज्य सरकार के अधिकार निलंबित हो जाएंगे। राष्ट्रपति शासन 6 महीने तक चल सकता है, जो संसदीय अनुमोदन के अधीन है। इस अवधि के दौरान, शासन की देखरेख केंद्र सरकार द्वारा की जाएगी और राज्य में लोकतांत्रिक कामकाज को बहाल करने के लिए नए चुनाव कराए जाने की संभावना है।

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