जिला परिषद स्कूल प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)  
यवतमाल

यवतमाल के झरी जामणी के 13 सरकारी स्कूल 'शिक्षक विहीन', विधायक संजय देरकर ने विधानसभा में सरकार को घेरा

Yavatmal School News: आदिवासी बहुल झरी जामणी तहसील के 13 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है और कुल 101 पद खाली हैं। विधायक संजय देरकर ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाकर तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

केतकी मोडक

Yavatmal-Zhari Jamani School Teacher Shortage: खनन क्षेत्र से सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलने के बावजूद आदिवासी बहुल यवतमाल जिले के झरी जामणी तहसील के सरकारी स्कूलों में शिक्षक संकट गहराता जा रहा है। इस गंभीर मुद्दे को विधायक संजय देरकर ने महाराष्ट्र विधानसभा में औचित्य के मुद्दे के माध्यम से उठाते हुए सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

विधायक देरकर ने सदन को बताया कि वर्ष 2025-26 की स्वीकृत संरचना के अनुसार, झरी जामणी तहसील में 305 शिक्षक पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से 101 पद वर्तमान में रिक्त हैं। इतना ही नहीं, तहसील के 13 जिला परिषद स्कूल पूरी तरह बगैर शिक्षकों के हैं। वहीं कई स्कूलों में एक ही शिक्षक को 2 से 3 कक्षाओं का पढ़ाई कार्य संभालना पड़ रहा है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

13 स्कूल बिना शिक्षक के, 101 पद खाली

उन्होंने कहा कि दुर्गम और आदिवासी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई, समय पर पाठ्यक्रम पूरा होने, परीक्षा की तैयारी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। शिक्षक नहीं होने से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है और शिक्षा के अधिकार पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

विधायक देरकर ने यह भी कहा कि झरी जामणी खनन प्रभावित क्षेत्र है, जहां से सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन स्थानीय शिक्षा व्यवस्था को उसका लाभ नहीं मिल रहा। उन्होंने सवाल किया कि जब क्षेत्र से करोड़ों का राजस्व मिलता है, तो स्थानीय विद्यार्थियों को पर्याप्त शिक्षक क्यों उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।

'जीरो टीचर' स्कूलों को प्राथमिकता दें

उन्होंने मांग की कि झरी जामणी के सभी रिक्त शिक्षक पदों को तत्काल भरा जाए, 'जीरो टीचर' स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं तथा आवश्यकता पड़ने पर खनिज विकास निधि से संविदा शिक्षकों की नियुक्ति कर शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए। विधायक संजय देरकर ने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा का मुद्दा केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सरकार को तत्काल ठोस कार्रवाई करनी चाहिए।

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