सांसद पहुंचा जेल (फाइल फोटो) 
यवतमाल

यवतमाल का वो 'खरात बाबा', जिसके चरणों में झुकती थी दिल्ली की सत्ता! सांसद बनने निकला था, पहुंच गया जेल

Ashok Kharaat Baba Yavatmal: यवतमाल के 'खरात बाबा' का काला सच! VVIP दौरों से लेकर लोकसभा चुनाव और फिर जेल की सलाखों तक का सफर। अंधविश्वास और राजनीति के खेल पर विशेष रिपोर्ट।

प्रिया जैस

Mauli Baba Yavatmal Case: एक ओर महिलाओं का शोषण और दूसरी ओर करोड़ों की अवैध संपत्ति जमा करने वाले अशोक खरात का मामला इस समय मीडिया और सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी बीच यवतमाल में भी ऐसे ही एक ‘खरात बाबा’ का मामला फिर से चर्चा में आ गया है। कभी केंद्रीय मंत्रियों से लेकर कई प्रतिष्ठित लोग इस बाबा के चरणों में झुकते थे, लेकिन सांसद बनने का सपना देखते-देखते उसे जेल की हवा खानी पड़ी।

यह पूरा मामला साल 2018 का है। उस समय केंद्र सरकार की एक महिला मंत्री अचानक यवतमाल शहर पहुंचीं। उन्होंने पूरे दिन यहां बिताया, लेकिन उनके दौरे की जानकारी न तो राज्य सरकार को थी और न ही स्थानीय प्रशासन को। दो दिन बाद इस गुप्त दौरे की भनक मीडिया को लगी। जांच में सामने आया कि वह मंत्री दिल्ली से खास तौर पर यवतमाल के एक ‘बाबा’ के दर्शन के लिए आई थीं।

इसके दो दिन बाद उसी मंत्री के सांसद पुत्र भी चुपचाप उसी बाबा से मिलने पहुंचे। उनके दौरे की भी किसी को जानकारी नहीं थी। इसके बाद बाबा के राजनीतिक संपर्कों की लंबी सूची सामने आने लगी, जिसे खुद बाबा ने धीरे-धीरे उजागर किया। कुछ ही दिनों बाद इस बाबा ने यवतमाल के एक होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि उसे भाजपा से लोकसभा टिकट मिलने वाला है।

उसने यह भी कहा कि टिकट के सिलसिले में उसे दिल्ली बुलाया गया है और वह जल्द ही रवाना होगा। इसके बाद मीडिया में खबरें तेज हो गईं कि महाराष्ट्र में ‘योगी मॉडल’ लागू हो सकता है और यवतमाल सीट पर मौजूदा सांसद भावना गवली को चुनौती मिल सकती है। हालांकि कुछ ही दिनों में भाजपा ने इस बाबा से किनारा कर लिया।

बावजूद इसके, बाबा ने यवतमाल-वाशिम लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा। उसे करारी हार मिली और उसकी जमानत जब्त हो गई। इसके बाद उसके खिलाफ विभिन्न आपराधिक मामलों की जांच शुरू हुई और आखिरकार वह भंडारा पुलिस के हत्थे चढ़ गया।

एक और ‘माऊली’ चर्चा में

पिछले साल यवतमाल के वंजारी फैल इलाके में ‘माऊली’ नाम का एक और ढोंगी बाबा सामने आया था। उसने एक महिला और उसकी 14 वर्षीय बेटी को इलाज के नाम पर करीब एक साल तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान दोनों को अमानवीय यातनाएं दी गईं। जुलाई में जब पुलिस उसे पकड़ने पहुंची, तो उसने खुद ही अपना गला काट लिया। ऐसे कई ‘ढोंगी बाबा’ न सिर्फ यवतमाल बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सक्रिय हैं। जरूरत है कि लोगों को जागरूक कर इनका पर्दाफाश किया जाए।

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