IAS तुकाराम मुंडे की कार्रवाई (सौजन्य-सोशल मीडिया) 
यवतमाल

IAS तुकाराम मुंडे की कार्रवाई: यवतमाल ZP के 21 फर्जी दिव्यांग कर्मचारी सस्पेंड, ‘साहब’ भी पहुंचे HC

Yavatmal Fake Disability Scam: IAS तुकाराम मुंडे की सख्ती के बाद यवतमाल ZP ने 21 फर्जी दिव्यांग कर्मचारियों को निलंबित किया। सत्यापन में 11 कर्मचारी शिक्षा विभाग के पाए गए।

प्रिया जैस

IAS Tukaram Munde Action: यवतमाल जिला परिषद में वर्षों से चर्चा में रहा फर्जी विकलांग कर्मचारियों का मामला आखिरकार आईएएस तुकाराम मुंडे के फैसले से उजागर होने लगा है। दो महीने पहले यवतमाल जिला परिषद द्वारा किए गए दिव्यांग कर्मचारियों के सत्यापन में कुछ संदिग्ध कर्मचारी पाए गए थे। आखिरकार जिला परिषद ने इनमें से 21 को सीधे निलंबित कर झटका दिया है।

शुक्रवार शाम को हुई इस घटना ने जिला परिषद के साथ-साथ जिले के अन्य फर्जी दिव्यांगों के दिलों को झकझोर कर रख दिया है। राज्य के दिव्यांग कल्याण विभाग का सूत्र आईएएस तुकाराम मुंडे के हाथ में आते ही उन्होंने फर्जी दिव्यांगों के खिलाफ मुहिम शुरू कर दी। उनका आदेश आते ही यवतमाल जिला परिषद ने सितंबर महीने में दिव्यांगता प्रमाण पत्र का लाभ ले रहे कर्मचारियों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन शुरू कर दिया।

सात दिन की दी थी समय सीमा

सभी को उनके यूडीआईडी ​​कार्ड और दिव्यांगता प्रमाण पत्र के साथ सत्यापन के लिए बुलाया गया था। इस बार ऑफलाइन विकलांगता प्रमाण पत्र जमा करने वाले कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए थे। ऑनलाइन प्रमाण पत्र जमा करने के लिए सात दिन की समय सीमा भी दी गई थी। लेकिन ये 'संदिग्ध' कर्मचारी सार्वभौमिक विकलांगता पहचान पत्र जमा नहीं कर पाए। आखिरकार ऐसे 21 कर्मचारियों पर निलंबन की गाज गिर गई है। 14 नवंबर को जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंदार पत्की ने यह आदेश जारी किया। निलंबित कर्मचारियों में कई विभागों के कर्मचारी शामिल हैं। इनमें शिक्षा विभाग सबसे बड़ा है। अन्य विभागों के भी कुछ कर्मचारी हैं। जिला परिषद द्वारा शुक्रवार को जारी निलंबन आदेश में 21 लोग शामिल हैं। इनमें से 11 शिक्षा विभाग के हैं। इसके बाद पंचायत विभाग के छह और सामान्य प्रशासन विभाग के चार कर्मचारियों को निलंबित किया गया है।

  • 21 कर्मचारी सत्यापन में पाए गए फेल
  • 11 चालाक कर्मचारी शिक्षा विभाग में मिले

'साहब' कोर्ट गए

जिला परिषद द्वारा किए गए सत्यापन में, ऑनलाइन विकलांगता प्रमाण पत्र जमा नहीं कर पाने वाले कर्मचारियों को नोटिस दिए गए। इसमें सामान्य कर्मचारियों के साथ-साथ एक पंचायत समिति के समूह शिक्षा अधिकारी भी शामिल हैं। अपने 'साहब' को भी फर्जी शिक्षकों की सूची में शामिल देखकर जिले भर के शिक्षकों में रोष व्याप्त हो गया।

लेकिन यही 'साहब' कुछ शिक्षकों के साथ अब हाई कोर्ट चले गए हैं और उन्हें कोर्ट से राहत मिल गई है। कोर्ट का अंतिम फैसला अभी नहीं आया है। इसलिए जिला परिषद ने शुक्रवार को जारी निलंबन आदेश में इस कोर्ट में गए कर्मचारियों को बाहर कर दिया है।

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