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उमरखेड में 'काली दिवाली' कार्यक्रम के दौरान विधायक रोहित पवार ने राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों की आलोचना की।
सूखा प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपए आर्थिक सहायता देने की मांग की।
खेत मजदूर परिवारों को आर्थिक संकट से राहत देने के लिए 25 हजार रुपए देने की मांग उठाई।
Umarkhed Black Diwali Protest: यवतमाल जिले में सूखे का संकट गंभीर होता जा रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री और पालकमंत्री को राजनीति से ऊपर उठकर किसानों, खेत मजदूरों और पानी की समस्या पर चर्चा करनी चाहिए। सूखे की मार नेताओं को नहीं, बल्कि आम किसानों और खेत मजदूरों को झेलनी पड़ती है।
ऐसे में इस संकट की जिम्मेदारी कौन लेगा? यह सवाल राकां शरद के विधायक रोहित पवार ने उठाते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों के निषेध में उमरखेड़ के छत्रपति शिवाजी महाराज चौक पर आयोजित 'काली दिवाली' कार्यक्रम में किसानों से संवाद करते हुए रोहित पवार ने सरकार के कामकाज की कड़ी आलोचना की।
उन्होंने दावा किया कि यवतमाल जिले में बारिश का प्रमाण लगभग 40 प्रतिशत घटा है। आगामी दो महीनों में ही जिले के कई गांवों में पेयजल की स्थिति गंभीर हो सकती है। उन्होंने कहा कि जिले का किसान इस समय दोहरी मार झेल रहा है। पिछले वर्ष अतिवृष्टि से फसलों का नुकसान हुआ और इस वर्ष सूखे ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
ऐसी परिस्थिति में मुख्यमंत्री और पालकमंत्री को अन्य राजनीतिक मुद्दों को दरकिनार कर किसानों की समस्याओं पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए, रोहित पवार ने कहा कि सोयाबीन, कपास और तुअर का उत्पादन घटा है, जबकि खाद, कीटनाशक, डीजल, मजदूरी और अन्य कृषि सामग्री की लागत लगातार बढ़ रही है।
जब खेतों में उत्पादन ही नहीं होगा, तो बाजार में छह-सात हजार रुपए प्रति क्विंटल भाव मिलने से भी किसान को क्या फायदा होगा? किसान को आर्थिक संकट से उबारने के लिए सरकार को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता देनी चाहिए।
कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष वर्षाताई निकम, प्रदेश महासचिव प्रदीप देवसरकर, विधानसभा अध्यक्ष राजू जयस्वाल, तहसील अध्यक्ष स्वप्निल कनवाले, ओबीसी सेल के जिलाध्यक्ष भास्करराव पंडागले, सरोजताई देशमुख, एड. बलिराम मुटकुले, सतीश नाईक, संदीप ठाकरे, राजू कवाने, गजेंद्र ठाकरे सहित अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।
आगामी दिनों में जलसंकट और गंभीर होने की आशंका जताते हुए उन्होंने पशुओं के लिए चारा और पानी की समुचित व्यवस्था करने की मांग की। साथ ही खेत मजदूर परिवारों को 25 हजार रुपए तथा किसानों को प्रति हेक्टेयर एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग सरकार से की।
यवतमाल सहित विदर्भ में किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आत्महत्या कोई रास्ता नहीं है। सरकार को झुकाने के लिए लोकतांत्रिक तरीके से सड़कों पर उतरकर संघर्ष करना होगा। इस दौरान रोहित पवार ने उमरखेड में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा से जुड़े मुद्दे को भी उठाया।। उन्होंने इस विषय को विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया।