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यवतमाल जिले की गोचर भूमि पर दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले पशुओं को चराने की अनुमति नहीं होगी।
जिलाधिकारी विकास मीना ने यह प्रतिबंध अगले आदेश तक लागू किया है।
जिले में वर्तमान में कुल 8,18,138 पशुधन उपलब्ध हैं।
Yavatmal Drought Situation: यवतमाल जिले में उत्पन्न सूखे जैसी स्थिति को देखते हुए स्थानीय पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत जिले के बाहर तथा अन्य राज्यों से आने वाले पशुधन को यवतमाल जिले की सीमा में स्थित गोचर भूमि पर चराई के लिए लाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष विकास मीना ने 23 अक्टूबर से अगले आदेश तक यह प्रतिबंध लागू किया है।
वर्ष 2026 के खरीफ सीजन में ट्रिगर-1 लागू किए गए राज्य के 265 तहसीलों में यवतमाल जिले के सभी 16 तहसीलें शामिल हैं। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने सूखा घोषित कर विभिन्न उपाययोजनाएं एवं रियायतें लागू करने का निर्णय लिया है। जिले में वर्तमान में कुल 8 लाख 18 हजार 138 पशुधन उपलब्ध है।
खरीफ सीजन में हुई बुआई तथा पशुसंवर्धन विभाग द्वारा किए जाने वाले चारे के वितरण को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने अनुमान जताया है कि उपलब्ध चारा 15 अप्रैल 2027 तक ही पर्याप्त रह सकता है।
इसी संभावित कमी को देखते हुए स्थानीय पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध स्थानीय पशुधन के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा संभावित चारा संकट से निपटने के उद्देश्य से लगाया गया है।
जिले के बाहर अथवा अन्य राज्यों से आने वाली भेड़, बकरी, गाय, भैंस सहित अन्य पशुओं को यवतमाल जिले की गोचर भूमि पर चराई के लिए लाने की अनुमति नहीं होगी। आदेश का उल्लंघन कर बाहरी पशुधन को चराई के लिए लाने वाले संबंधित पशुपालकों के विरुद्ध भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।